BEML ने भारत की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन 'Bharat 28' के महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल 'स्क्वीज टेस्ट' को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह सफलता कंपनी के ₹5,400 करोड़ के बड़े ऑर्डर को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, हालांकि निवेशकों की नजर कंपनी की हालिया तिमाही घाटे और गवर्नेंस से जुड़ी चुनौतियों पर टिकी है।
इंजीनियरिंग का बड़ा पड़ाव
BEML लिमिटेड ने अपनी 'Bharat 28' (B-28) हाई-स्पीड ट्रेन के प्रोजेक्ट में एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग मील का पत्थर हासिल कर लिया है। बेंगलुरु स्थित सुविधा केंद्र में किए गए 'स्क्वीज टेस्ट' में ट्रेन की बॉडी ने 249 किमी/घंटा की रफ्तार पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव को सफलतापूर्वक झेल लिया है। यह टेस्टिंग चरण यात्री सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है, जिसके बाद ही ट्रेन फाइनल असेंबली की ओर बढ़ेगी।
बड़े ऑर्डर का दबाव और डेडलाइन
यह विकास नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के साथ कंपनी की प्रतिबद्धता को मजबूती देता है। कंपनी को ₹5,400 करोड़ से अधिक का यह भारी-भरकम ऑर्डर हाई-स्पीड रोलिंग स्टॉक की सप्लाई और लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस के लिए मिला है। इसकी पहली ट्रायल रन अगस्त 2027 में सूरत-वापी सेक्शन पर होने की योजना है, जो मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर के सपने को साकार करेगी।
फाइनेंशियल चुनौतियां और गवर्नेंस
भले ही यह प्रोजेक्ट 'आत्मनिर्भर भारत' की बड़ी उपलब्धि हो, लेकिन BEML को वित्तीय मोर्चे पर कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी को ₹27.01 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस हुआ है। साथ ही, कंपनी पर वर्किंग कैपिटल डेट का भारी बोझ है। इसके अलावा, बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की कमी के कारण गवर्नेंस संबंधी नियमों का पालन करना भी कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिस पर रेगुलेटरी अथॉरिटीज की पैनी नजर है।
निवेशक अब 5 नवंबर, 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग का इंतजार कर रहे हैं, जहां कंपनी अपने लेटेस्ट फाइनेंशियल रिजल्ट्स पेश करेगी। अब देखना यह होगा कि कंपनी अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे सुधारती है और गवर्नेंस संबंधी दिक्कतों को कैसे दूर करती है।
