सरकारी कंपनी BEML ने Integral Coach Factory (ICF) से वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बनाने का **₹180.6 करोड़** का ऑर्डर हासिल किया है। इस बड़ी डील के बावजूद, निवेशकों के लिए कंपनी की खराब वर्किंग कैपिटल और गवर्नेंस से जुड़ी चुनौतियां चिंता का विषय बनी हुई हैं।
रेल मैन्युफैक्चरिंग में BEML का विस्तार
रक्षा, खनन और परिवहन के क्षेत्र में काम करने वाली BEML लिमिटेड ने अब अपनी रेल और मेट्रो बिजनेस को और मजबूत करने के लिए ₹180.6 करोड़ का नया ऑर्डर हासिल किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट इंडियन रेलवे के उस मिशन का हिस्सा है, जिसके तहत पुरानी ट्रेनों को आधुनिक और हाई-स्पीड 'वंदे भारत' स्लीपर ट्रेन सेट से बदला जा रहा है। 2026 की शुरुआत में पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के लॉन्च के बाद, यह ऑर्डर कंपनी के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
फाइनेंशियल हेल्थ और ऑपरेशनल रिस्क
ऑर्डर तो बड़ा है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर कंपनी के फाइनेंशियल स्वास्थ्य पर है। सबसे बड़ी चिंता का विषय 'डेब्टर डेज' (Debtor Days) है, जो फिलहाल 191 दिन के ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। इसका मतलब है कि कंपनी को पैसा वसूलने में लंबा समय लग रहा है, जिससे उसका वर्किंग कैपिटल फंस जाता है।
इसके अलावा, बढ़ते खर्चों के चलते प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है। प्रोडक्शन के दौरान किसी भी तरह के डिजाइन बदलाव या देरी से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने का रिस्क रहता है। यही वजह है कि कई मार्केट एनालिस्ट्स कंपनी के इन फाइनेंशियल इंडिकेटर्स को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
गवर्नेंस पर भी है निवेशकों की नजर
वित्तीय प्रदर्शन के अलावा, शेयरहोल्डर्स कंपनी के गवर्नेंस और कंप्लायंस पर भी नजर रखे हुए हैं। बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की संख्या को लेकर चल रही समीक्षा और हालिया इस्तीफों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए कंपनी किस तरह अपने बोर्ड की संरचना और मैनेजमेंट की खामियों को दूर करती है, यह देखना बेहद अहम होगा।
