गर्मी का सितम: पावर ग्रिड पर रिकॉर्ड मांग का दबाव
देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच सोमवार को भारत के पावर ग्रिड ने 257.37 गीगावाट (GW) की अब तक की सबसे अधिक मांग दर्ज की। यह पिछले महीने बनाए गए रिकॉर्ड से भी आगे निकल गया। दोपहर 15:42 बजे के आसपास पीक डिमांड 257.37 GW रही, जबकि शाम को मांग 241.24 GW दर्ज की गई। इस लगातार उच्च मांग से देश की ऊर्जा जरूरतों में भारी बढ़ोतरी साफ दिख रही है।
ऊर्जा मिश्रण और सप्लाई का गणित
इस रिकॉर्ड मांग को पूरा करने के लिए ग्रिड ने विभिन्न स्रोतों का सहारा लिया। कोयला आधारित बिजली संयंत्रों ने 69% योगदान दिया, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा (renewable sources) ने 28% बिजली सप्लाई की। इतना अधिक दबाव होने के बावजूद, पीक पर सिर्फ 601 मेगावाट (MW) की कमी महसूस की गई। हालांकि, 32.54 GW की मौजूदा जनरेशन आउटेज (generation outages) ने ग्रिड की क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं, जो मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरियों को उजागर करता है।
बढ़ती खपत के पीछे के कारण
यह नया रिकॉर्ड भारत में ऊर्जा की बढ़ती खपत के ट्रेंड को दिखाता है। अप्रैल में ऊर्जा की खपत में पिछले साल की तुलना में 4% की वृद्धि दर्ज की गई थी। इस बढ़ोतरी के पीछे मौसमी बदलाव, खासकर तीव्र हीटवेव और असामान्य बारिश जैसे कारण शामिल हैं। सरकार का अनुमान है कि इस साल मांग 270 GW तक पहुंच सकती है, जिसके लिए फाइनेंशियल ईयर 26 तक 65 GW नई क्षमता जोड़ने की योजना है।
ग्लोबल मार्केट और भविष्य की ज़रूरतें
यह रिकॉर्ड मांग ऐसे समय में आई है जब ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अस्थिरता है और भारत नवीकरणीय ऊर्जा के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करने में जुटा है। ग्रिड ने भले ही लचीलापन दिखाया हो, लेकिन जनरेशन आउटेज यह दर्शाते हैं कि क्षमता बढ़ाने और ग्रिड को आधुनिक बनाने में लगातार निवेश की ज़रूरत है। खासकर, नवीकरणीय ऊर्जा की अनिश्चितता को प्रबंधित करना दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। चीन जैसे देश भी इसी तरह की मांग वृद्धि का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनके इंफ्रास्ट्रक्चर अलग हैं।
सिस्टम पर दबाव और जोखिम
लगातार बनी रहने वाली उच्च मांग और बड़ी मात्रा में जनरेशन आउटेज, भारत की बिजली आपूर्ति के लिए एक बड़ा जोखिम पेश करते हैं। अगर मौसम की चरम स्थितियां और बढ़ीं, तो ग्रिड की क्षमता पर और दबाव आ सकता है। सप्लाई में निरंतरता बनाए रखने के लिए नई क्षमता जोड़ना और मौजूदा पावर प्लांट्स, खासकर कोयला आधारित इकाइयों का कुशल संचालन सुनिश्चित करना आवश्यक है, जो वर्तमान सप्लाई की रीढ़ हैं।
