ज्यादातर लोग Health Insurance के रिन्यूअल को सिर्फ एक बिल भुगतान की तरह लेते हैं, जो आपको मुसीबत में डाल सकता है। मेडिकल महंगाई और बदलती पॉलिसी शर्तों को देखते हुए रिन्यूअल से पहले सम इंश्योर्ड, रूम रेंट लिमिट और नेटवर्क अस्पतालों की जांच करना जरूरी है।
ज्यादातर पॉलिसीधारक हेल्थ इंश्योरेंस रिन्यूअल को एक सामान्य काम मानते हैं। प्रीमियम भरते ही पॉलिसी को फाइल में डाल दिया जाता है और पूरे साल उसे दोबारा नहीं देखा जाता। लेकिन अगर आप अपने परिवार को बढ़ते मेडिकल खर्चों से बचाना चाहते हैं, तो रिन्यूअल को सिर्फ ट्रांजैक्शन नहीं, बल्कि एक 'फाइनेंशियल ऑडिट' की तरह देखें।
मेडिकल इन्फ्लेशन का असर
भारत में मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ रहे हैं। जो हेल्थ कवर आपको 3-4 साल पहले पर्याप्त लगता था, वह आज एक बड़ी सर्जरी का खर्च उठाने में कम पड़ सकता है। अगर आपका सम इंश्योर्ड (Sum Insured) कई सालों से नहीं बढ़ा है, तो आप अंडर-इंश्योर्ड हैं। बजट कम होने पर 'सुपर टॉप-अप प्लान' का विकल्प चुनें, जो कम खर्च में एक्स्ट्रा कवरेज देता है।
पॉलिसी की बारीकियाँ (Fine Print) समझें
इंस्योरर समय-समय पर पॉलिसी की शर्तें बदलते रहते हैं। खास तौर पर 'रूम रेंट सब-लिमिट' और 'को-पेमेंट' क्लॉज पर नजर रखें। कई बार मरीज को पता नहीं होता कि उसे बिल का कितना हिस्सा खुद देना पड़ सकता है। साथ ही, बीमारियों के लिए 'वेटिंग पीरियड' को दोबारा चेक करें ताकि क्लेम के समय कोई झटका न लगे।
नेटवर्क अस्पतालों की लिस्ट देखें
कैशलेस सुविधा के लिए अस्पताल का इंश्योरेंस कंपनी के नेटवर्क में होना जरूरी है। अस्पताल अपनी पार्टनरशिप बदलते रहते हैं, इसलिए रिन्यूअल से पहले अपने नजदीकी नेटवर्क अस्पतालों की लिस्ट चेक कर लें। अस्पताल से डिस्चार्ज के समय रिइम्बर्समेंट (Reimbursement) के चक्कर में पड़ना एक बड़ी प्रशासनिक मुसीबत बन सकता है।
रिकॉर्ड्स को अपडेट रखें
क्लेम में देरी की एक बड़ी वजह गलत जानकारी है। रिन्यूअल का समय अपने कॉन्टैक्ट डिटेल्स, नॉमिनी और फैमिली मेंबर्स की जानकारी को अपडेट करने का सबसे अच्छा मौका है। ध्यान रहे, ग्रेस पीरियड के अंदर ही रिन्यूअल करें, ताकि आपके जमा हुए वेटिंग पीरियड बेनिफिट्स सुरक्षित रहें। डेडलाइन चूकने पर पॉलिसी के सभी पुराने फायदे खत्म हो सकते हैं और आपको शून्य से शुरुआत करनी पड़ सकती है।
