अमीर निवेशक मार्केट में गिरावट को घबराहट में बिकवाली करके नहीं, बल्कि तय ढांचे और लिक्विडिटी (Liquidity) के सहारे संभालते हैं। उनका फोकस शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव पर नहीं, बल्कि टारगेट एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) बनाए रखने पर रहता है।
अमीर निवेशक क्यों नहीं घबराते?
बाजार में जब भी उथल-पुथल (Volatility) मचती है, तो ज्यादातर निवेशक घबराकर बिकवाली करने लगते हैं। लेकिन, अनुभवी और अमीर निवेशक इस दौरान बिल्कुल अलग रवैया अपनाते हैं। वे मार्केट में गिरावट को पैनिक (Panic) का कारण नहीं, बल्कि लंबी अवधि की प्लानिंग और तय नियमों के सहारे इससे निपटने का मौका मानते हैं।
डिसिप्लिन (Discipline) ही है कुंजी
इन निवेशकों की सबसे बड़ी खासियत है उनका तय ढांचा (Framework)। ये निवेशक स्ट्रक्चर्ड पोर्टफोलियो (Structured Portfolio) का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) की रेंज पहले से तय होती है। जब मार्केट ऊपर-नीचे होता है, तो ये अपने तय नियमों के हिसाब से अगला कदम उठाते हैं। यह सिस्टम उन्हें इमोशनल होकर फैसले लेने से बचाता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई एसेट क्लास (Asset Class) बहुत गिर जाती है, तो रीबैलेंसिंग (Rebalancing) के नियम के तहत वे उसे वापस टारगेट एलोकेशन पर लाने के लिए और खरीद सकते हैं।
लिक्विडिटी (Liquidity) और टाइम हॉराइजन (Time Horizon)
बाजार में टिके रहने के लिए लिक्विडिटी का होना बहुत जरूरी है। जो निवेशक अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इक्विटी (Equity) पर निर्भर रहते हैं, उन्हें अक्सर कम कीमत पर शेयर बेचने पड़ते हैं। इसके उलट, अमीर निवेशक अपने पास लिक्विड एसेट्स (Liquid Assets) जैसे कैश, लिक्विड फंड्स या शॉर्ट-टर्म डेट (Short-term Debt) का बफर रखते हैं। यह बफर उनकी 1 से 3 साल तक की जरूरतें पूरी कर सकता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि बाजार में दबाव के दौरान उनके लॉन्ग-टर्म इक्विटी पोर्टफोलियो पर कोई आंच न आए और वे मार्केट के ठीक होने का इंतजार कर सकें।
एसेट क्लास में डाइवर्सिफिकेशन (Diversification)
डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) यानी निवेश को अलग-अलग जगहों पर फैलाना, एक और बड़ा बचाव का तरीका है। डेट (Debt), गोल्ड (Gold), रियल एस्टेट (Real Estate) और इंटरनेशनल मार्केट्स (International Markets) जैसी अलग-अलग कैटेगरी में निवेश करके ये निवेशक किसी एक एसेट क्लास में गिरावट के असर को कम करते हैं। क्योंकि अलग-अलग एसेट्स अलग-अलग इकोनॉमिक कंडीशंस (Economic Conditions) में अलग तरह से परफॉर्म करते हैं, डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में उतनी बड़ी गिरावट नहीं आती, जितनी सिर्फ स्टॉक में निवेश वाले पोर्टफोलियो में आती है।
गिरावट में स्ट्रैटेजिक रीबैलेंसिंग (Strategic Rebalancing)
जब इक्विटी मार्केट गिरता है, तो डिसिप्लिन्ड निवेशक इसे एक मैकेनिकल प्रोसेस की तरह देखते हैं। वे यह नहीं सोचते कि मार्केट से निकल जाएं, बल्कि वे यह देखते हैं कि उनका मौजूदा होल्डिंग (Holding) उनके तय एलोकेशन से कितना दूर चला गया है। अगर शेयर काफी गिर गए हैं, तो वे अपने लॉन्ग-टर्म गोल्स (Long-term Goals) के हिसाब से एक्सपोजर (Exposure) बढ़ा सकते हैं। कम दाम पर खरीदना और अच्छा परफॉर्म करने वाली पोजीशन को ट्रिम (Trim) करना, यह इंस्टिट्यूशनल-स्टाइल इन्वेस्टिंग (Institutional-style Investing) का एक अहम हिस्सा है। इसमें मार्केट की मौजूदा भावना के खिलाफ जाने का हौसला चाहिए, लेकिन यह उन लोगों के लिए बेहतर लॉन्ग-टर्म नतीजे देता है जो मौजूदा दबाव के बावजूद अपने फोकस को बनाए रख पाते हैं।
