रिटायरमेंट के बाद मंथली इनकम के लिए कई लोग IDCW ऑप्शन चुनते हैं, लेकिन यह आपकी उम्मीदों पर पानी फेर सकता है। जानिए क्यों Systematic Withdrawal Plan (SWP) पैसों के मैनेजमेंट और टैक्स बचाने के मामले में कहीं ज्यादा बेहतर है।
रिटायरमेंट के बाद एक नियमित कमाई के लिए बहुत से निवेशक म्यूचुअल फंड्स में 'Income Distribution cum Capital Withdrawal' (IDCW) विकल्प को चुनते हैं। नाम सुनने में भरोसेमंद लगता है, जैसे कि यह कोई पक्का डिविडेंड हो, लेकिन सच यह है कि IDCW पूरी तरह से फंड के सरप्लस पर निर्भर करता है। अगर फंड ने मुनाफा नहीं कमाया, तो आपको कोई भुगतान नहीं मिलेगा। यह उन लोगों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है, जिन्हें अपने खर्चों के लिए एक तय तारीख पर फिक्स्ड इनकम की जरूरत होती है।
SWP क्यों है बेहतर?
फाइनेंशियल प्लानर्स इसलिए Systematic Withdrawal Plan (SWP) की सलाह देते हैं। इसमें आप अपनी जरूरत के हिसाब से एक फिक्स्ड अमाउंट तय कर सकते हैं, जो हर महीने आपके खाते में आता रहेगा। यह न केवल आपके फाइनेंस को प्रेडिक्टेबल बनाता है, बल्कि इसमें मार्केट के उतार-चढ़ाव का असर भी कम होता है।
टैक्स का खेल समझिए
IDCW में मिलने वाला पैसा आपकी 'Income from Other Sources' माना जाता है और यह आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। अगर आप हाई टैक्स ब्रैकेट में हैं, तो यह घाटे का सौदा है। वहीं, SWP में केवल मुनाफे वाले हिस्से पर ही कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। अगर आप 12 महीने से ज्यादा समय तक होल्डिंग रखते हैं, तो ₹1.25 लाख से ज्यादा के प्रॉफिट पर केवल 12.5% टैक्स देना पड़ता है।
सावधानी भी जरूरी है
हालांकि, SWP में एक बड़ा रिस्क 'कैपिटल इरोजन' का होता है। अगर आप निवेश से ज्यादा पैसा निकालने लगेंगे, तो आपकी मूल पूंजी (Principal Corpus) खत्म होने लगेगी। जानकारों का कहना है कि निकासी की दर 3% से 4% के बीच ही रखें, ताकि आपका पैसा लंबे समय तक चलता रहे। साथ ही, हमेशा 'एग्जिट लोड' की भी जांच कर लें, जो कुछ स्कीम्स में जल्दी पैसे निकालने पर लग सकता है।
अंत में, एक सफल रिटायरमेंट के लिए अपने पोर्टफोलियो को रिव्यू करना और यह समझना जरूरी है कि आपके कैश फ्लो की जरूरतें क्या हैं। SWP न सिर्फ आपके पैसे पर कंट्रोल देता है, बल्कि टैक्स के नजरिए से भी यह IDCW की तुलना में काफी समझदारी भरा फैसला है।
