गाड़ी या संपत्ति के छोटे नुकसान के लिए इंश्योरेंस क्लेम फाइल करना अक्सर आपकी जेब पर भारी पड़ता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आप अपना नो-क्लेम बोनस (NCB) खो देते हैं और अनिवार्य डिडक्टिबल्स (Deductibles) के कारण होने वाला नुकसान क्लेम की राशि से कहीं अधिक हो जाता है।
बहुत से लोग इंश्योरेंस को हर छोटी खरोंच या टूट-फूट के लिए रिफंड का जरिया मानते हैं। लेकिन, इंश्योरेंस को मेंटेनेंस बजट समझना आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण है 'नो-क्लेम बोनस' (NCB)।\n\nजब आप एक साल तक कोई क्लेम नहीं करते, तो कंपनियां अगले साल के प्रीमियम पर 20% से लेकर 50% तक का डिस्काउंट देती हैं। अगर आप छोटे रिपेयर के लिए क्लेम करते हैं, तो यह डिस्काउंट पूरी तरह खत्म हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि आपका सालाना प्रीमियम ₹20,000 है और आप पर 50% NCB लागू है, तो आप ₹10,000 बचा रहे हैं। ऐसे में मात्र ₹5,000 के क्लेम के लिए आप अपना ₹10,000 का डिस्काउंट और डिडक्टिबल दोनों गंवा देते हैं।\n\n### डिडक्टिबल्स (Deductibles) का असर\n\nपॉलिसी में एक 'डिडक्टिबल' अमाउंट होता है, जो कंपनी क्लेम देने से पहले आपकी जेब से कटवाती है। यदि रिपेयर का खर्च ₹5,000 है और आपका डिडक्टिबल ₹2,000 है, तो कंपनी केवल ₹3,000 देगी। जब आप इसमें अपने खोए हुए NCB को जोड़ते हैं, तो असल नुकसान क्लेम की राशि से बहुत ज्यादा हो जाता है।\n\n### इंश्योरेंस कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं?\n\nकंपनियां अपनी 'लॉस रेशियो' को मैनेज करने के लिए इस मॉडल का इस्तेमाल करती हैं। इससे प्रशासनिक खर्च कम होता है और प्रीमियम दरें स्थिर बनी रहती हैं।\n\n### क्लेम करने से पहले क्या करें?\n\nकिसी भी क्लेम को फाइल करने से पहले 'ब्रेक-ईवन एनालिसिस' जरूर करें। यदि रिपेयर का खर्च डिडक्टिबल के आसपास है, तो बेहतर है कि अपनी जेब से भुगतान करें और अपना NCB सुरक्षित रखें। क्लेम करने से पहले हमेशा वर्कशॉप से सटीक एस्टीमेट लें और अपनी पॉलिसी में मौजूद NCB प्रतिशत को जरूर चेक करें।
