Settled Loans: क्या आपका 'Settled' लोन बिगाड़ रहा है क्रेडिट स्कोर? जानें पूरा सच

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AuthorNeha Patil|Published at:
Settled Loans: क्या आपका 'Settled' लोन बिगाड़ रहा है क्रेडिट स्कोर? जानें पूरा सच

बहुत से कर्जदार अनजाने में लोन 'सेटल' (Settled) को 'क्लोज्ड' (Closed) मान लेते हैं, जो आगे चलकर लोन या क्रेडिट कार्ड रिजेक्शन का कारण बनता है। सेटलमेंट से कर्ज से तो मुक्ति मिलती है, लेकिन बैंक इसे अधूरा भुगतान मानते हैं।

भारतीय बैंकिंग सिस्टम में जब कर्जदार आर्थिक तंगी में होते हैं, तो वे बैंकों के साथ एक समझौते पर पहुंचते हैं, जिसे 'Debt Settlement' कहा जाता है। इसमें कुल बकाया राशि से कम देकर कर्ज खत्म किया जाता है। बहुत से लोग इसे लोन का पूरी तरह भुगतान मान लेते हैं, जो एक बड़ी गलती है।

क्यों खतरनाक है 'Settled' स्टेटस?

एक 'Closed' अकाउंट का मतलब है कि आपने अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाई है और बैंक आप पर भरोसा कर सकता है। वहीं, 'Settled' स्टेटस का मतलब है कि आपने कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक पूरा भुगतान नहीं किया। बैंक इसे एक Red Flag के तौर पर देखते हैं, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर गिर सकता है और आगे चलकर लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना मुश्किल हो जाता है।

कैसे सुधारें स्थिति?

यह स्टेटस स्थायी नहीं है। अगर आपकी आर्थिक स्थिति सुधरती है, तो आप बैंक से बात करके उस बकाया राशि का भुगतान कर सकते हैं जिसे पहले माफ किया गया था। इसके बाद बैंक से No Objection Certificate (NOC) या सेटलमेंट लेटर लेना न भूलें।

स्टेटस अपडेट का प्रोसेस

पैसे भरने के बाद, यह जानकारी CIBIL, Equifax, या Experian जैसे क्रेडिट ब्यूरो तक पहुँचने में 15 से 30 दिन लग सकते हैं। यदि बैंक जानकारी अपडेट नहीं करता, तो आप क्रेडिट ब्यूरो के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं। अपनी क्रेडिट रिपोर्ट पर नज़र रखना एक बेहतर फाइनेंशियल प्रोफाइल बनाने के लिए बेहद जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.