क्रेडिट कार्ड का सिर्फ 'मिनिमम ड्यू' भरना आपके कर्ज को कभी खत्म नहीं होने देता। इस पर लगने वाला ब्याज **40%** से ज्यादा हो सकता है, जिससे आपका पैसा मूलधन घटाने के बजाय केवल शुल्क चुकाने में निकल जाता है।
क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' देखकर बहुत से लोग राहत की सांस लेते हैं। यह लेटनेस फीस से बचने और अकाउंट एक्टिव रखने का आसान तरीका जरूर लगता है, लेकिन इसे एक सही फाइनेंशियल स्ट्रेटजी समझना आपकी सबसे बड़ी भूल हो सकती है।
क्यों महंगा है यह 'छोटा भुगतान'?
बैंक आमतौर पर क्रेडिट कार्ड पर 3% से 3.75% तक का मासिक ब्याज वसूलते हैं। सुनने में यह कम लग सकता है, लेकिन सालाना आधार पर यह 45% को पार कर जाता है। ऊपर से इस ब्याज पर 18% GST का अतिरिक्त बोझ भी पड़ता है। जब आप सिर्फ मिनिमम ड्यू भरते हैं, तो आपका ज्यादातर पैसा इस ब्याज और टैक्स को चुकाने में चला जाता है, और मूलधन (Principal) जस का तस बना रहता है।
ग्र्रेस पीरियड खत्म होने का खतरा
कार्ड पर मिलने वाला 'इंटरेस्ट-फ्री पीरियड' तभी तक काम करता है जब तक आप पूरा बिल समय पर चुकाते हैं। जैसे ही आप पूरा बिल नहीं भरते, यह सुविधा खत्म हो जाती है। इसके बाद आप जो भी नई खरीदारी करते हैं, उस पर पहले दिन से ही ब्याज जुड़ने लगता है, जिससे आपका कर्ज तेजी से कंपाउंड होकर बढ़ने लगता है।
क्रेडिट स्कोर पर सीधा असर
लेंडर्स आपके 'क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो' को बारीकी से देखते हैं। हर महीने भारी बकाया रखने से बैंक को लगता है कि आप फाइनेंशियल दबाव में हैं, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर तेजी से गिरता है। भविष्य में लोन लेना मुश्किल और महंगा हो जाता है।
सलाह: हमेशा पूरा आउटस्टैंडिंग बैलेंस चुकाने की कोशिश करें। यदि आप कर्ज के जाल में हैं, तो पर्सनल लोन लेकर क्रेडिट कार्ड का महंगा कर्ज चुकाना एक बेहतर विकल्प हो सकता है क्योंकि उसकी ब्याज दरें तुलनात्मक रूप से कम होती हैं।
