NPS में टैक्स-फ्री एसेट रीबैलेंसिंग: म्यूचुअल फंड से बेहतर क्यों है यह विकल्प?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
NPS में टैक्स-फ्री एसेट रीबैलेंसिंग: म्यूचुअल फंड से बेहतर क्यों है यह विकल्प?

National Pension System (NPS) अपने निवेशकों को बिना किसी कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) के अलग-अलग एसेट क्लासेस के बीच पैसा शिफ्ट करने की सुविधा देता है। यह म्यूचुअल फंड्स के मुकाबले एक बड़ा फायदा है, जहां रीबैलेंसिंग पर अक्सर टैक्स देना पड़ता है।

लंबे समय के लिए पोर्टफोलियो मैनेज करते समय रिस्क और रिटर्न का संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। म्यूचुअल फंड्स में जब आप अपना पैसा इक्विटी से डेट फंड में शिफ्ट करते हैं, तो इसे रिडम्पशन (Redemption) माना जाता है। इस पर आपको कैपिटल गेन्स टैक्स देना पड़ता है, जो आपके मुनाफे को कम कर सकता है।\n\nNPS इस टैक्स बाधा को पूरी तरह हटा देता है। इसमें आप इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज के बीच बिना किसी टैक्स के स्विच कर सकते हैं। यह लचीलापन आपको अपनी उम्र और जरूरतों के हिसाब से रिस्क मैनेज करने की आजादी देता है।\n\n### एसेट रीबैलेंसिंग कैसे काम करती है?\n\nसमय के साथ बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण पोर्टफोलियो का एलोकेशन बदल जाता है। रीबैलेंसिंग का मतलब है कि जो एसेट बढ़ गया है उसे बेचकर पैसा वहां डालना जहां एलोकेशन कम हो गया है। NPS में इसके लिए दो विकल्प हैं:\n\n1. Auto Choice: इसमें फंड मैनेजर आपकी उम्र के हिसाब से इक्विटी एक्सपोजर को ऑटोमैटिक तरीके से कम करते रहते हैं।\n2. Active Choice: इसमें आप खुद तय करते हैं कि पैसा इक्विटी, डेट या सरकारी बॉन्ड्स में कितना जाएगा।\n\n### लिक्विडिटी और लॉक-इन का ध्यान रखें\n\nटैक्स-फ्री रीबैलेंसिंग का फायदा जरूर है, लेकिन NPS एक रिटायरमेंट टूल है। इसमें म्यूचुअल फंड्स की तरह जब चाहें पैसा नहीं निकाला जा सकता। 60 साल की उम्र तक इसमें सख्त लॉक-इन पीरियड होता है। इसलिए, इसे शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के बजाय रिटायरमेंट प्लानिंग के एक शक्तिशाली हथियार के रूप में देखना ही समझदारी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.