क्या आप अपने बचत खाते (Savings Account) में बहुत ज़्यादा पैसा रखते हैं? अगर हाँ, तो यह आपकी दौलत के लिए साइलेंट किलर साबित हो सकता है। महंगाई की मार से आपके पैसे की कीमत लगातार घट रही है!
बचत खाते का सच
भारत में ज़्यादातर लोग अपने पैसे की सुरक्षा को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं और इसलिए भारी-भरकम रकम बचत खातों में रख देते हैं। ये खाते भले ही पैसों तक आसान पहुँच देते हों, लेकिन इनसे मिलने वाला सालाना ब्याज (Interest Rate) अक्सर 2.5% के आसपास ही रहता है। वहीं, देश में महंगाई की दर 5% से 6% के पार चल रही है। इसका मतलब है कि आपके पैसे की असली कीमत (Real Value) समय के साथ घट रही है।
महंगाई का गणित
इसे समझना बहुत आसान है। मान लीजिए आपने 10 लाख रुपये एक बचत खाते में 10 साल के लिए रखे, जहाँ आपको 2.5% ब्याज मिल रहा है। तो 10 साल बाद आपके खाते में करीब 12.8 लाख रुपये होंगे। लेकिन, अगर इसी दौरान महंगाई औसतन 6% रही, तो उतने ही सामान और सेवाओं की कीमत बढ़कर करीब 17.9 लाख रुपये हो जाएगी। ऐसे में, आपके पास 5 लाख रुपये से ज़्यादा की खरीद शक्ति (Purchasing Power) कम हो जाएगी, जिसे आप वापस नहीं पा सकते।
बचत खाते से आगे बढ़ें
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स (Financial Experts) की मानें तो बचत खाते का इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) के लिए होना चाहिए। एक समझदार रणनीति यह है कि आप अपनी 6 से 12 महीने की ज़रूरी ज़िंदगी के खर्चों के बराबर पैसा ही खाते में रखें। ये पैसा किसी भी अचानक आने वाली ज़रूरत या पेमेंट के लिए तुरंत उपलब्ध होना चाहिए।
लेकिन, जो पैसा आपकी तुरंत की ज़रूरतों से ज़्यादा है, उसे ऐसी जगहों पर निवेश करना चाहिए जो महंगाई को मात दे सके। अगर आपको एक साल के अंदर पैसों की ज़रूरत पड़ सकती है, तो लिक्विड फंड्स (Liquid Funds) या शॉर्ट-टर्म फिक्स्ड डिपॉजिट (Short-Term Fixed Deposits) जैसे विकल्प आपको बचत खाते से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं और ये काफी हद तक लिक्विड भी होते हैं। एक से तीन साल की अवधि वाले लक्ष्यों के लिए, शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फंड्स (Short-Duration Debt Funds) या टारगेट मैच्योरिटी फंड्स (Target Maturity Funds) बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न (Risk-Adjusted Returns) दे सकते हैं।
लम्बे समय के लिए धन निर्माण
अगर आपके फाइनेंशियल लक्ष्य 10 साल या उससे ज़्यादा दूर हैं, जैसे रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) या बच्चों की पढ़ाई, तो सिर्फ नकदी या कम ब्याज वाले बचत खातों पर निर्भर रहना काफी नहीं है। इतिहास गवाह है कि इक्विटी (Equities) ने लंबे समय में नकदी या उसके बराबर के निवेशों से कहीं ज़्यादा रिटर्न दिया है। अपने लम्बे समय के पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा इक्विटी मार्केट्स (Equity Markets) में लगाने से, आप महंगाई को मात देकर अपनी दौलत बढ़ा सकते हैं।
अगला कदम यह है कि आप अपने बैंक खाते के बैलेंस की समीक्षा करें और पहचानें कि आपको कितनी राशि सचमुच इमरजेंसी के लिए चाहिए और कितना पैसा सिर्फ यूँ ही पड़ा हुआ है। अतिरिक्त पैसे को सही निवेश साधनों में डालने से यह सुनिश्चित होगा कि आपका पैसा आपके लिए काम करे, न कि बढ़ती कीमतों के कारण अपनी कीमत गंवाए।
