सेविंग्स अकाउंट में जरूरत से ज्यादा कैश रखना आपकी परचेजिंग पावर को महंगाई के कारण घटा रहा है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि **3 से 6 महीने** के खर्च का इमरजेंसी फंड अलग रखें और बाकी पैसा इक्विटी या एफडी में निवेश करें।
सेविंग्स अकाउंट में मोटी रकम रखना सुरक्षित लग सकता है, लेकिन यह आपके लंबे समय के फाइनेंशियल गोल्स के लिए नुकसानदेह हो सकता है। बैंक का पैसा तुरंत काम तो आता है, लेकिन इसकी वैल्यू महंगाई के मुकाबले तेजी से गिरती है। जब महंगाई दर बैंक द्वारा दिए जाने वाले ब्याज से ज्यादा होती है, तो आपके पैसों की क्रय शक्ति यानी परचेजिंग पावर समय के साथ खत्म होने लगती है।
पैसा बढ़ाने की रणनीति
फाइनेंशियल प्लानर्स के अनुसार, सिर्फ इमरजेंसी जरूरतों के लिए कैश रखना समझदारी है, लेकिन सरप्लस कैपिटल को लो-इंटरेस्ट अकाउंट में छोड़ना एक बड़ी गलती है। सबसे पहले 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च के लिए एक इमरजेंसी फंड बनाएं, ताकि मुसीबत के समय आपको अपने लॉन्ग-टर्म निवेश को नुकसान में न बेचना पड़े।
गणित समझें: ₹15 लाख का उदाहरण
मान लीजिए आपके पास ₹15 लाख हैं। अगर यह सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में पड़ा रहे, तो इसकी ग्रोथ न के बराबर होगी। लेकिन अगर आप इसे 8% रिटर्न वाले फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में डालते हैं, तो 8 साल में यह करीब ₹27.7 लाख हो सकता है। वहीं, अगर आप इसे डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स में 12% सालाना रिटर्न के लक्ष्य के साथ निवेश करते हैं, तो यही राशि 8 साल में ₹37.1 लाख तक पहुँच सकती है।
सही बैलेंस कैसे बनाएं?
पोर्टफोलियो बनाते समय आपको सिर्फ एक विकल्प पर टिके नहीं रहना चाहिए:
- फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): मध्यम अवधि के लक्ष्यों और सुरक्षित निवेश के लिए बेहतर।
- इक्विटी म्यूचुअल फंड्स: लंबे समय में महंगाई को मात देने और वेल्थ क्रिएशन के लिए सबसे कारगर।
- स्मॉल सेविंग स्कीम्स और PPF: पोर्टफोलियो की सुरक्षा के लिए सरकारी गारंटी वाले विकल्प।
अंत में, अपने हर एक रुपये का एक मकसद तय करें। लिक्विडिटी और ग्रोथ के बीच सही बैलेंस बनाना ही सफल निवेश की कुंजी है। बाजार के बदलते हालातों के साथ अपने पोर्टफोलियो का समय-समय पर रिव्यू करते रहें ताकि वह आपकी बदलती जरूरतों के मुताबिक रहे।
