Health Insurance Update: मेडिकल खर्चों में भारी बढ़ोतरी, क्या आपकी पॉलिसी है काफी?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Health Insurance Update: मेडिकल खर्चों में भारी बढ़ोतरी, क्या आपकी पॉलिसी है काफी?

बढ़ती मेडिकल महंगाई (Medical Inflation) आज कल भारतीय परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में, सिर्फ बेसिक हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पर निर्भर रहना काफी नहीं है। नॉन-मेडिकल खर्चे और लॉन्ग-टर्म केयर के लिए एक अलग मेडिकल फंड बनाना बेहद जरूरी हो गया है।

बढ़ते स्वास्थ्य खर्चों का दबाव

मेडिकल खर्चों का लगातार बढ़ना भारतीय परिवारों के बजट पर भारी पड़ रहा है। सामान्य महंगाई दर से ज्यादा रफ्तार से बढ़ती मेडिकल महंगाई के चलते डॉक्टर की फीस, स्पेशलिस्ट की सलाह और इमरजेंसी में अस्पताल के खर्चे जेब पर भारी पड़ रहे हैं। उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य की जरूरतें बदल जाती हैं, ऐसे में सिर्फ बचत पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

सीनियर सिटीजन्स के लिए सुरक्षा कवच

खासकर सीनियर सिटीजन्स के लिए हेल्थ इंश्योरेंस एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करता है। डायबिटीज, हार्ट डिजीज या घुटने के बदलने जैसी बड़ी बीमारियों के इलाज में अचानक बड़ा खर्च आ सकता है। एक अच्छी पॉलिसी परिवार को बड़ा कैश भुगतान करने से बचाती है, क्योंकि नेटवर्क अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिल जाती है। यह भी जरूरी है कि प्री-एग्जिस्टिंग बीमारियों के लिए जरूरी वेटिंग पीरियड पूरा करने के लिए पॉलिसी जल्दी खरीदी जाए।

इंश्योरेंस और लॉन्ग-टर्म केयर का गैप

हालांकि हेल्थ इंश्योरेंस बहुत जरूरी है, लेकिन यह हर जरूरत को पूरा नहीं करता। ज्यादातर स्टैंडर्ड प्लान सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने और कुछ खास प्रोसीजर पर फोकस करते हैं। ऐसे में, परिवार को अन्य जरूरतों के लिए अपनी जेब से काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। बढ़ती उम्र के साथ, माता-पिता को अक्सर ऐसी मदद की जरूरत होती है जो पारंपरिक इंश्योरेंस के दायरे में नहीं आती, जैसे होम नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, घर पर नियमित चेकअप और पर्सनल केयर सर्विसेज। ये लगातार होने वाले नॉन-मेडिकल खर्चे तेजी से बढ़ सकते हैं और परिवार इनके लिए तैयार नहीं रहता।

अलग मेडिकल फंड बनाने की सलाह

जिन खर्चों को इंश्योरेंस कंपनियां कवर नहीं करतीं, उन्हें संभालने के लिए फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स एक अलग, डेडिकेटेड मेडिकल फंड बनाने की सलाह देते हैं। यह पैसा स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए ही रखा जाना चाहिए। इससे नॉन-मेडिकल खर्चे, अस्पताल में भर्ती न होने पर होने वाले डायग्नोस्टिक टेस्ट और पॉलिसी में शामिल न होने वाले ट्रीटमेंट जैसे खर्चों को कवर करने में मदद मिलती है। लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट को तोड़ना या पर्सनल लोन लेने के बजाय, एक समर्पित फंड स्वास्थ्य संकट के दौरान परिवार को बेहतर फाइनेंशियल स्टेबिलिटी देता है।

प्लान रिव्यू की अहमियत

समय के साथ लोगों की स्वास्थ्य जरूरतें बदलती हैं। हो सकता है कि पांच साल पहले आपके लिए पर्याप्त रही पॉलिसी आज उतनी कारगर न हो। ऐसे में, परिवारों को अपनी मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों की नियमित रूप से समीक्षा करनी चाहिए। इसमें आपकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, शहर में बढ़ती मेडिकल सेवाओं की लागत और सम एश्योर्ड की पर्याप्तता जैसे फैक्टर शामिल होने चाहिए। पॉलिसी को अपडेट रखना और एक फ्लेक्सिबल मेडिकल फंड बनाए रखना, बढ़ते स्वास्थ्य खर्चों से लंबी अवधि की फाइनेंशियल सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.