EMI का बोझ 40% से ज़्यादा नहीं! फाइनेंस एक्सपर्ट्स की सलाह क्यों है ज़रूरी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
EMI का बोझ 40% से ज़्यादा नहीं! फाइनेंस एक्सपर्ट्स की सलाह क्यों है ज़रूरी

फाइनेंस प्लानर्स की मानें तो अपनी कुल मासिक लोन किस्तों (EMIs) को आपकी नेट इनकम के **35-40%** तक सीमित रखना फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए बेहद ज़रूरी है। इससे बचत, इमरजेंसी फंड और लॉन्ग-टर्म गोल्स के लिए पर्याप्त पैसा बचता है।

Detailed Coverage

कर्ज का मैनेजमेंट पर्सनल फाइनेंस की एक अहम कड़ी है। होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसी क्रेडिट फैसिलिटीज़ तुरंत ज़रूरतें पूरी करने या एसेट्स खरीदने में मदद करती हैं, लेकिन ये लगातार पेमेंट की ऑब्लिगेशन भी बनाती हैं। अगर इन्हें सही से ट्रैक न किया जाए तो ये घर के बजट पर भारी पड़ सकती हैं। फाइनेंस एक्सपर्ट्स लगातार सलाह देते हैं कि आपकी सभी ईएमआई (EMIs) का टोटल आपकी नेट मंथली इनकम के 35-40% के अंदर ही रहना चाहिए।

टोटल डेट को कैलकुलेट करने का महत्व

कई बार उधार लेने वाले एक अकेले लोन की कॉस्ट को अलग-अलग कैलकुलेट करने की गलती कर बैठते हैं। जब आप कोई नया फाइनेंशियल ऑब्लिगेशन लेने की सोच रहे हों, तो अपने मौजूदा सभी लोन पेमेंट्स को जोड़ना ज़रूरी है। इसमें कार लोन, एजुकेशन लोन और क्रेडिट कार्ड की ईएमआई भी शामिल है। अगर इन पेमेंट्स का टोटल आपकी मंथली कमाई का बड़ा हिस्सा ले लेता है, तो अचानक आने वाले खर्चों से निपटने या रेगुलर इन्वेस्टमेंट जारी रखने की आपकी क्षमता काफी कम हो जाती है। कोई भी नया लोन लेने से पहले, आपको अपने मौजूदा टोटल डेट-टू-इनकम रेशियो का इवैल्यूएशन करना चाहिए।

बैंक की एलिजिबिलिटी से परे

बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस अक्सर आपकी इनकम और क्रेडिट स्कोर के आधार पर आपकी मैक्सिमम बोरिंग कैपेसिटी कैलकुलेट करते हैं। लेकिन, यह आंकड़ा एक सीलिंग (Ceiling) होता है और आपकी पर्सनल फाइनेंशियल सिचुएशन या रिटायरमेंट प्लानिंग जैसे लॉन्ग-टर्म गोल्स को नहीं दर्शाता। लेंडर द्वारा ऑफर की गई मैक्सिमम अमाउंट लेना शायद आपकी तुरंत की चाहत पूरी कर दे, लेकिन यह सालों तक आपकी फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी को सीमित कर सकता है। यह ज़्यादा समझदारी का काम है कि आप यह कैलकुलेट करें कि आप कितना आराम से चुका सकते हैं, जबकि आपके लाइफस्टाइल और सेविंग्स के लिए भी पर्याप्त पैसा बच जाए।

फाइनेंशियल बदलावों के लिए तैयार रहना

समय के साथ फाइनेंशियल ज़रूरतें बदलती हैं। परिवार पालने, बूढ़े माता-पिता को सपोर्ट करने या करियर में अचानक बदलाव आने जैसे खर्चे आपकी मंथली कैश फ्लो को अनपेक्षित रूप से बदल सकते हैं। अगर आपका डेट पेमेंट पहले से ही मैक्सिमम लिमिट पर है, तो ये लाइफ चेंजेज़ गंभीर फाइनेंशियल प्रेशर पैदा कर सकते हैं। अपनी टोटल ईएमआई को 40% लिमिट से काफी नीचे रखने से आप एक सेफ्टी नेट (Safety Net) तैयार करते हैं जो कम इनकम या उम्मीद से ज़्यादा खर्चों के दौरान आपकी फाइनेंशियल हेल्थ को प्रोटेक्ट करता है।

किसी भी बरोअर के लिए सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटर (Monitor) है अपने टोटल डेट आउटफ्लो (Debt Outflow) का अपनी टेक-होम पे (Take-home Pay) से रेशियो। कोई भी नया हाई-इंटरेस्ट डेट लेने से पहले, यह ज़रूर सोचें कि यह आपके भविष्य के लिए सेव करने और अपनी रोज़मर्रा की लाइफस्टाइल को बनाए रखने की आपकी क्षमता को कैसे प्रभावित करता है। इस परसेंटेज को रेगुलरली ट्रैक करने से आपको पुराने कर्ज़ चुकाने के लिए नया क्रेडिट लेने के साइकल (Cycle) से बचने में मदद मिल सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.