FD से भी बेहतर? 10 साल में बेकार इक्विटी फंड ने भी दिए शानदार रिटर्न, जानें कैसे!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
FD से भी बेहतर? 10 साल में बेकार इक्विटी फंड ने भी दिए शानदार रिटर्न, जानें कैसे!

एक चौंकाने वाले विश्लेषण में सामने आया है कि 10 साल के दौरान एक मामूली प्रदर्शन वाले फ्लेक्सी-कैप फंड में लगाया गया **₹1 करोड़** का निवेश टैक्स से पहले बढ़कर **₹2.53 करोड़** हो गया, जबकि टॉप-रेटेड फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में यही पैसा **₹2.01 करोड़** ही रह गया। टैक्स के बाद यह अंतर और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इक्विटी पर टैक्स कम है।

टैक्स का खेल: FD और इक्विटी में बड़ा अंतर

ज़्यादातर भारतीय निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसा लगाना पसंद करते हैं। लेकिन, लंबे समय तक FD में भारी रकम रखने पर टैक्स और महंगाई की मार झेलनी पड़ती है, जिसे अक्सर निवेशक नज़रअंदाज़ कर देते हैं। हाल ही में हुए एक तुलनात्मक विश्लेषण से पता चला है कि इक्विटी में किया गया निवेश, भले ही वह अपने कैटेगरी में सबसे अच्छा प्रदर्शन न करे, फिर भी फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में कहीं ज़्यादा धन पैदा कर सकता है।

इसकी मुख्य वजह दोनों के निवेश पर लगने वाले टैक्स का तरीका है। फिक्स्ड डिपॉजिट से होने वाली कमाई को आपकी सालाना इनकम में जोड़ा जाता है और उस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से, जो 30% तक हो सकता है, टैक्स लगता है। यह हर साल लगने वाला टैक्स आपके मूलधन को कम कर देता है, जिस पर आगे कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) नहीं हो पाती।

इसके विपरीत, इक्विटी म्यूचुअल फंड पर टैक्स तभी लगता है जब आप अपने यूनिट्स बेचते हैं। फिलहाल, इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर 1.25 लाख रुपये की छूट के बाद 12.5% का फ्लैट टैक्स लगता है। इस व्यवस्था के कारण, आपका पूरा निवेश होल्डिंग पीरियड के दौरान कंपाउंडिंग का फायदा उठाता रहता है। एक दशक में, टैक्स के इस अंतर के कारण इक्विटी फंड का आफ्टर-टैक्स रिटर्न फिक्स्ड डिपॉजिट से कहीं ज़्यादा हो जाता है।

प्रदर्शन और जोखिम का तुलनात्मक अध्ययन

पिछले 10 सालों के आंकड़ों को देखें तो, Taurus Flexi Cap Growth फंड, जिसे अक्सर कमज़ोर प्रदर्शन वाले फंड के तौर पर देखा जाता है, ने 9.71% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दिया। इस फंड में ₹1 करोड़ का निवेश टैक्स से पहले बढ़कर ₹2.53 करोड़ हो गया। वहीं, इसी अवधि में Suryoday Small Finance Bank की सबसे अच्छी FD ने 7.25% का रिटर्न दिया, जिससे ₹1 करोड़ का निवेश टैक्स से पहले केवल ₹2.01 करोड़ हुआ। यह इक्विटी फंड के पक्ष में लगभग 25% का प्री-टैक्स अंतर दिखाता है।

स्थिरता चाहने वाले निवेशक आर्बिट्रेज फंड्स (Arbitrage Funds) की ओर भी देखते हैं। Kotak Arbitrage Fund Regular ने प्री-टैक्स आधार पर टॉप FD से कम रिटर्न दिया, लेकिन टैक्स के फायदे के कारण यह आफ्टर-टैक्स बेसिस पर FD के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन करता है। आर्बिट्रेज फंड्स में लिक्विडिटी (तरलता) ज़्यादा होती है और बैंक डिपॉजिट की तरह प्रीमैच्योर विथड्रॉल पर पेनाल्टी का झंझट भी नहीं होता।

सुरक्षा और क्रय शक्ति में संतुलन

हालांकि यह डेटा 10 साल की अवधि में इक्विटी की क्षमता को दर्शाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जोखिम को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए या FD में पैसा लगाना पूरी तरह बंद कर दिया जाए। फिक्स्ड डिपॉजिट अपने खास कामों, जैसे इमरजेंसी फंड या छोटी अवधि के लिए पूंजी की सुरक्षा, के लिए ज़रूरी हैं जहाँ उतार-चढ़ाव से बचना हो। लेकिन, अगर पैसा लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए है और आपात स्थिति में ज़रूरत नहीं पड़ने वाली, तो सिर्फ सुरक्षा के नाम पर FD चुनने की एक छिपी हुई लागत काफी बड़ी हो सकती है। निवेशकों को यह सोचना चाहिए कि क्या वे लंबी अवधि में महंगाई और टैक्स के कारण अपनी बचत की क्रय शक्ति खो रहे हैं, और क्या उनका पोर्टफोलियो उनके समय सीमा और वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.