FPSB India के CEO रमेश विश्वनाथन ने चेतावनी दी है कि रिटायरमेंट के लिए सिर्फ एक 'मैजिक नंबर' पर निर्भर रहना टालमटोल (procrastination) को बढ़ावा देता है। यह तरीका महंगाई और जीवन की बदलती जरूरतों को नजरअंदाज करता है।
बहुत से लोग रिटायरमेंट प्लानिंग के नाम पर एक 'मैजिक नंबर' जमा करने के जाल में फंस जाते हैं। FPSB India के CEO रमेश विश्वनाथन का मानना है कि यह सोच अक्सर देरी (procrastination) का कारण बनती है। चूंकि रिटायरमेंट के लिए घर खरीदने या बच्चों की शिक्षा जैसा कोई तत्काल दबाव नहीं होता, इसलिए लोग इसे टालते रहते हैं।
प्लानिंग में देरी का जोखिम
जब आप रिटायरमेंट प्लानिंग में देरी करते हैं, तो बाद के वर्षों में लक्ष्य को पूरा करने के लिए तनाव और हड़बड़ी बढ़ती है। समस्या यह है कि एक तय की गई रकम महंगाई के असर और भविष्य की बदलती जरूरतों को पूरा करने में नाकाम रहती है। आज जो राशि आपको बड़ी लग रही है, वह कई दशकों बाद अपनी क्रय शक्ति (purchasing power) खो देगी।
प्रोफेशनल प्लानिंग क्यों है जरूरी?
Financial Planning Standards Board (FPSB) का डेटा बताता है कि 82% लोगों ने प्रोफेशनल प्लानर के साथ काम करने के बाद खुद को अधिक सुरक्षित महसूस किया। ज्यादातर ग्राहकों ने माना कि उन्हें मिली सलाह की वैल्यू उसके लिए दी गई फीस से कहीं ज्यादा थी।
सिर्फ निवेश काफी नहीं
बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग का मतलब केवल निवेश करना नहीं है, बल्कि इसमें कैश फ्लो मैनेजमेंट, डेट (कर्ज) कम करना, पर्याप्त इंश्योरेंस कवर लेना और लाइफ गोल्स को तय करना शामिल है। आज के दौर में जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जानकारी की भरमार है, तब एक पर्सनल स्ट्रैटेजी ही आपको शोर से दूर रखकर आपके रिस्क और टाइमलाइन के अनुसार सही रास्ता दिखा सकती है।
