मेट्रो शहरों में ₹5 लाख का हेल्थ कवर अब काफी नहीं? जानें क्यों है बढ़ी हुई ज़रूरत

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AuthorNeha Patil|Published at:
मेट्रो शहरों में ₹5 लाख का हेल्थ कवर अब काफी नहीं? जानें क्यों है बढ़ी हुई ज़रूरत

भारत के बड़े शहरों में मेडिकल खर्चों के लगातार बढ़ने से, कई परिवार ₹5 लाख के स्टैंडर्ड हेल्थ इंश्योरेंस प्लान को अपर्याप्त पा रहे हैं। इलाज के बढ़ते खर्चों से बचने के लिए नियमित समीक्षाएं और टॉप-अप प्लान ज़रूरी हो गए हैं।

Detailed Coverage

क्यों ₹5 लाख का कवर अब कम पड़ रहा है?

भारत में मेडिकल इन्फ्लेशन (Medical Inflation) आम लोगों के बजट से कहीं तेज़ी से बढ़ रहा है। खासकर मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे जैसे बड़े शहरों में, किसी प्राइवेट अस्पताल में एक छोटी सी सर्जरी या कुछ दिनों के इलाज का खर्च ₹5 लाख के सामान्य सम एश्योर्ड (Sum Insured) से ज़्यादा हो सकता है। ऐसे में, अगर एक ही साल में परिवार के एक से ज़्यादा सदस्यों को मेडिकल सहायता की ज़रूरत पड़ जाए, तो ये बेसिक पॉलिसी जल्दी खत्म हो जाती है और बाकी का खर्च परिवार को अपनी जेब से उठाना पड़ता है।

ज़्यादा कवर की ज़रूरत क्यों?

एक बड़ी चुनौती यह है कि इंश्योरेंस की लिमिट, मेडिकल सेवाओं की बढ़ती कीमतों के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है। जो हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पाँच साल पहले काफी था, आज वह असल मेडिकल खर्चों का एक छोटा सा हिस्सा ही कवर कर पाता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेडिकल इन्फ्लेशन एक ऐसा छुपा हुआ खतरा है जो समय के साथ पॉलिसी की असल वैल्यू को कम कर देता है। इसलिए, पुरानी, फिक्स राशि वाली पॉलिसी पर निर्भर रहना किसी स्वास्थ्य आपातकाल में आर्थिक संकट ला सकता है।

बेहतर सुरक्षा के लिए स्मार्ट तरीके

बेस पॉलिसी पर सम एश्योर्ड बढ़ाना एक तरीका है, लेकिन इससे प्रीमियम (Premium) काफी बढ़ जाता है। इससे ज़्यादा किफायती और अपनाया जाने वाला तरीका है 'सुपर टॉप-अप प्लान' (Super Top-up Plan) का इस्तेमाल करना। एक बेसिक पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप प्लान को मिलाकर, परिवार एक बड़ा टोटल कवर हासिल कर सकते हैं, साथ ही प्रीमियम की लागत को भी कंट्रोल में रख सकते हैं। यह दो-स्तरीय रणनीति, महंगे प्रीमियम के भारी बोझ के बिना बड़े क्लेम (Claim) के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करती है।

सम एश्योर्ड से आगे देखें

सिर्फ टोटल कवर की राशि ही सब कुछ नहीं है। पॉलिसीहोल्डर्स को पॉलिसी के 'फाइन प्रिंट' यानी छोटी-छोटी बातों को ध्यान से देखना चाहिए, जिनमें ऐसे क्लॉज़ (Clause) हो सकते हैं जो असल क्लेम राशि पर असर डालते हैं। पॉलिसी रिव्यू के दौरान ध्यान देने योग्य ज़रूरी चीज़ों में शामिल हैं 'रूम रेंट लिमिट' (Room Rent Limit), जो अस्पताल के वार्ड चुनने की आपकी आज़ादी को सीमित कर सकती है, और 'को-पेमेंट क्लॉज़' (Co-payment Clause), जिसमें पॉलिसीहोल्डर बिल का कुछ हिस्सा खुद भरने पर सहमत होता है। इसके अलावा, 'नेटवर्क हॉस्पिटल लिस्ट' (Network Hospital List) और 'रिस्टोरेशन बेनिफिट' (Restoration Benefit) – जो साल के दौरान खत्म होने पर सम एश्योर्ड को ऑटोमैटिकली फिर से भर देता है – ये भी ऐसी चीज़ें हैं जो ज़्यादा फेस वैल्यू वाली लेकिन सख्त शर्तों वाली पॉलिसी से बेहतर सुरक्षा दे सकती हैं। इन प्लान्स को नियमित रूप से अपडेट करना, खासकर जीवन की बड़ी घटनाओं या आय में बड़े बदलावों के बाद, यह सुनिश्चित करता है कि आपकी फाइनेंशियल सुरक्षा परिवार की असल ज़रूरतों और बढ़ते मेडिकल खर्चों के हिसाब से बनी रहे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.