Warren Buffett का 90/10 निवेश मंत्र: लंबी अवधि में पैसा बनाने का सीक्रेट!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Warren Buffett का 90/10 निवेश मंत्र: लंबी अवधि में पैसा बनाने का सीक्रेट!

निवेश की दुनिया के दिग्गज Warren Buffett का एक ऐसा तरीका है जो आपको लंबी अवधि में शानदार रिटर्न दिला सकता है। इसे 90/10 रूल कहा जाता है। इस स्ट्रेटेजी में 90% पैसा एक कम लागत वाले S&P 500 इंडेक्स फंड में लगाया जाता है, और बाकी 10% शॉर्ट-टर्म सरकारी बॉन्ड में निवेश किए जाते हैं।

Warren Buffett की 90/10 स्ट्रेटेजी क्या है?

Warren Buffett की यह निवेश रणनीति काफी सीधी है। इसके तहत, आप अपने निवेश की कुल रकम का 90% हिस्सा एक ऐसे इंडेक्स फंड में लगाते हैं जो S&P 500 को ट्रैक करता हो और जिसकी लागत (fees) कम हो। वहीं, बचे हुए 10% पैसे को शॉर्ट-टर्म सरकारी बॉन्ड (जैसे ट्रेजरी बिल्स) में निवेश किया जाता है। Buffett ने यह तरीका अपने परिवार के लिए वसीयत के पैसे को मैनेज करने के लिए सुझाया था, ताकि निवेश सरल और कम खर्चीला रहे।

इंडेक्स फंड पर क्यों है जोर?

इस पोर्टफोलियो का मुख्य आधार S&P 500 में 90% का निवेश है। एक लो-कॉस्ट इंडेक्स फंड के जरिए निवेशक अमेरिका की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी पाता है। Buffett का मानना है कि ज्यादातर निवेशक, यहां तक कि कई फाइनेंसियल एक्सपर्ट्स भी, लंबी अवधि में बाजार से बेहतर प्रदर्शन करने में नाकाम रहते हैं। इंडेक्स फंड रखने से आप खराब परफॉर्म करने वाले शेयरों को चुनने के जोखिम से बच जाते हैं और अर्थव्यवस्था की ऐतिहासिक ग्रोथ का फायदा उठा पाते हैं।

सरकारी बॉन्ड का रोल

शॉर्ट-टर्म सरकारी बॉन्ड में 10% का निवेश एक लिक्विडिटी बफर (तात्कालिक जरूरत के लिए पैसा) और सुरक्षा कवच का काम करता है। जब शेयर बाजार में गिरावट आती है, तो पोर्टफोलियो का यह हिस्सा स्थिरता प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि आपको तत्काल नकदी की जरूरतें पूरी करने के लिए इक्विटी होल्डिंग्स को नुकसान पर बेचने की नौबत न आए। यह स्थिरता निवेशकों को बाजार में गिरावट के दौरान घबराहट में बिकवाली करने से रोकने में मदद करती है।

सादगी और कम लागत

इस रणनीति का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें अतिरिक्त खर्च कम होता है। एक्टिव म्यूचुअल फंड्स पर लगने वाली मोटी मैनेजमेंट फीस चक्रवृद्धि (compounding) के प्रभाव से लंबी अवधि में रिटर्न को काफी कम कर सकती है। पैसिव, लो-कॉस्ट इंडेक्स फंड्स को चुनकर, निवेशक बाजार से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने पास रख पाते हैं। इसके अलावा, 90/10 रूल को बहुत कम रखरखाव की जरूरत होती है, और टारगेट अनुपात बनाए रखने के लिए इसे साल में केवल एक या दो बार रीबैलेंस करने की जरूरत पड़ सकती है।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

हालांकि यह रणनीति लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए बनाई गई है, लेकिन यह हर किसी के लिए फिट नहीं बैठती। जिन निवेशकों का रिटायरमेंट नजदीक है, उन्हें अलग जोखिम प्रोफाइल की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि बाजार की बड़ी गिरावटों से उबरने के लिए उनके पास कम समय होता है। इसके अलावा, व्यक्तिगत रूप से अस्थिरता (volatility) झेलने की क्षमता महत्वपूर्ण है। जो लोग शेयर की कीमतों में बड़ी गिरावट के दौरान निवेशित रहना मुश्किल पाते हैं, उन्हें 90% इक्विटी एक्सपोजर वाला पोर्टफोलियो बहुत आक्रामक लग सकता है, भले ही S&P 500 के ऐतिहासिक फायदे हों। निवेशकों को ऐसी एलोकेशन अपनाने से पहले अपनी समय-सीमा और बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन करने की अपनी क्षमता का मूल्यांकन करना चाहिए।

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