एक टेक प्रोफेशनल की शादी करके जल्दी रिटायर होने की वायरल प्लानिंग पर बहस छिड़ गई है। हालांकि, फाइनेंशियल प्लानर्स चेता रहे हैं कि शादी जैसे बड़े फैसले को पैसों के लक्ष्यों से जोड़ना खतरनाक हो सकता है।
शादी से रिटायरमेंट का 'वायरल' प्लान: क्या यह सच में काम करेगा?
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक अनोखी चर्चा खूब वायरल हो रही है। बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल ने अपने रिटायरमेंट प्लानिंग का एक ऐसा तरीका बताया है, जिसमें वह एक ऐसे पार्टनर की तलाश में हैं जो उनके जल्दी रिटायरमेंट के सपने को पूरा करने में मदद करे। यह 'फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, रिटायर अर्ली' (FIRE) मूवमेंट के बढ़ते चलन को दिखाता है।
खतरे में 'पैसे' वाले रिश्ते
हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स इस सोच पर गहरी चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि शादी जैसे बड़े जीवन फैसले को सिर्फ रिटायरमेंट के पैसों के लक्ष्यों से जोड़ना बहुत बड़ा जोखिम है। अगर आप किसी पार्टनर की कमाई पर निर्भर होकर रिटायरमेंट प्लानिंग करते हैं, तो यह आपको कई अनिश्चितताओं के हवाले कर देता है। नौकरी छूटना, करियर बदलना या पारिवारिक परिस्थितियां बदल जाना, ये सब आपकी प्लानिंग को फेल कर सकते हैं। फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस का असल मतलब तो खुद की मजबूती है, न कि किसी और की कमाई पर निर्भर रहना।
फिल्मों के चक्कर में फंसा करियर?
एक्सपर्ट्स को एक और बड़ी चिंता यह है कि किसी व्यक्ति का IT जैसे स्थिर सेक्टर से निकलकर फिल्मों जैसे अनिश्चित क्षेत्र में जाने का प्लान कितना कारगर होगा। कॉर्पोरेट जॉब्स में जहां एक तय इनकम आती है, वहीं क्रिएटिव इंडस्ट्रीज में कमाई का कोई भरोसा नहीं होता। अगर ऐसे में कमाई रुक जाए तो रिटायरमेंट फंड पर भारी दबाव आ सकता है।
महंगाई और भविष्य की ज़रूरतें
रिटायरमेंट फंड का हिसाब लगाते समय महंगाई और भविष्य की बदलती जीवनशैली को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। जो फंड आज एक कपल के लिए काफी लग रहा है, चार लोगों के परिवार के लिए - जिसमें हेल्थकेयर, बच्चों की पढ़ाई और अचानक आने वाले खर्चे शामिल हों - वह शायद काफी न हो। अगर फंड कम पड़ा, तो आपको लंबे ब्रेक के बाद फिर से नौकरी ढूंढनी पड़ सकती है, जो कि मुश्किल हो सकता है।
अपनी तैयारी पर करें फोकस
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि जल्दी रिटायरमेंट का सपना देखने वालों को अपनी खुद की फाइनेंशियल मजबूती पर ध्यान देना चाहिए। एक ऐसा बजट बनाएं जिसमें बुरे से बुरे हालात, जैसे मेडिकल इमरजेंसी या बाजार में बड़ी गिरावट, का भी हिसाब हो। किसी दूसरे की कमाई पर निर्भर रहने के बजाय, अपनी क्षमता, कमाई के अलग-अलग जरियों और भविष्य की जिम्मेदारियों का सही अनुमान लगाकर ही जल्दी रिटायरमेंट की प्लानिंग करनी चाहिए।
