अक्सर लोग ₹10 लाख की कैश लिमिट को लेकर भ्रमित रहते हैं। असल में, यह बैंक द्वारा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को दी जाने वाली एक सूचना है, न कि कोई ट्रांजैक्शन बैन। जानिए ₹10 लाख की रिपोर्टिंग और ₹2 लाख की कैश रिसीप्ट के कड़े नियमों का पूरा सच।
बैंक अकाउंट में एक फाइनेंशियल ईयर के दौरान ₹10 लाख से ज्यादा कैश जमा करने को लेकर अक्सर लोग इसे गलत समझ लेते हैं। बहुत से निवेशकों को लगता है कि यह कोई कानूनी पाबंदी है, जबकि असलियत में यह केवल एक 'इंफॉर्मेशन ट्रिगर' है। बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बैंक इस तरह के ट्रांजैक्शन की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देते हैं।
रिपोर्टिंग सिस्टम कैसे काम करता है?
'स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस' (SFT) के नियमों के तहत, अगर आपके सेविंग्स अकाउंट में कुल जमा राशि ₹10 लाख के पार जाती है, तो बैंक इसकी रिपोर्ट देते हैं। करंट अकाउंट (Current Account) के लिए यह लिमिट ₹50 लाख प्रति फाइनेंशियल ईयर है। यह जानकारी आपके 'एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट' (AIS) में दिखाई देती है। यदि आपके पास जमा धन का वैध स्रोत (Source of Income) है, तो घबराने की जरूरत नहीं है, बस आपको जरूरत पड़ने पर इसका सबूत देना होगा।
₹2 लाख की कैश रिसीप्ट पर बड़ी पाबंदी
₹10 लाख की डिपॉजिट लिमिट को ₹2 लाख की रिसीप्ट लिमिट से बिल्कुल न मिलाएं। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 186 (2025) के तहत, एक दिन में या एक इवेंट के लिए किसी एक व्यक्ति से ₹2 लाख से ज्यादा नकद लेना पूरी तरह वर्जित है। इसका उल्लंघन करने पर आपको प्राप्त राशि के बराबर यानी 100% जुर्माना भरना पड़ सकता है।
डॉक्युमेंटेशन और सावधानियां
- सबूत रखें: हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए इनवॉइस, सेल डीड और बैंक विड्रॉल स्लिप जैसे कागजात संभाल कर रखें।
- स्मार्ट न बनें: अगर आप छोटे-छोटे टुकड़ों में पैसे जमा करके ₹10 लाख की लिमिट से बचना चाहते हैं, तो ध्यान रखें कि बैंक आपके PAN के जरिए इन सभी ट्रांजैक्शंस को जोड़कर ट्रैक करता है।
सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि अपनी हर बड़ी इनकम को अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में सही तरह से रिपोर्ट करें।
