अगस्त 2026 तक UPI ट्रांजेक्शन **24.5 अरब** के पार पहुंच चुके हैं, लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा भी बढ़ गया है। पैसे भेजने और प्राप्त करने के अंतर को समझना अब आपकी जेब सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है।
UPI आज भारत में पेमेंट का सबसे पसंदीदा जरिया बन गया है। जहां यह डिजिटल ट्रांजेक्शन को बेहद आसान बनाता है, वहीं गलतियां आपकी मेहनत की कमाई को जोखिम में डाल सकती हैं। सुरक्षा के लिए हर डिजिटल कदम पर सावधानी बरतना अनिवार्य है।
QR कोड का सही नियम
कई लोग यह गलती कर बैठते हैं कि पैसा पाने के लिए QR कोड स्कैन करना पड़ता है। याद रखें, QR कोड स्कैन करने और UPI पिन डालने का मतलब है—आपके बैंक अकाउंट से पैसा कटना। यदि कोई अनजान व्यक्ति रिफंड या इनाम के नाम पर QR कोड भेजे, तो वह आमतौर पर ठगी का तरीका होता है। ध्यान रहे, पैसे पाने के लिए कभी भी UPI पिन की जरूरत नहीं होती, यह सिर्फ पेमेंट करने के लिए होता है।
कलेक्ट रिक्वेस्ट (Collect Request) का खतरा
धोखेबाज अक्सर 'कलेक्ट रिक्वेस्ट' का सहारा लेते हैं। इसमें यूजर को एक रिक्वेस्ट आती है जिसे 'अप्रूव' करने को कहा जाता है। यूजर इसे पैसा आने की खुशी में स्वीकार कर लेता है, जबकि असल में वह अपने अकाउंट से पैसे डेबिट करने की अनुमति दे रहा होता है। कंफर्म करने से पहले स्क्रीन पर लिखे संदेश को ध्यान से पढ़ें। साथ ही, बैंक का कोई भी अधिकारी कभी भी फोन पर आपका UPI पिन नहीं मांगता।
शिकायत और जिम्मेदारी (Reporting & Liability)
यदि आपके साथ कोई अनधिकृत ट्रांजेक्शन हो जाता है, तो समय पर रिपोर्ट करना बहुत महत्वपूर्ण है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अनुसार, यदि आप संदिग्ध गतिविधि की सूचना 3 कार्य दिवसों के भीतर देते हैं, तो आपकी जिम्मेदारी सीमित हो सकती है। हालांकि, यदि आपने खुद अपना पिन साझा किया है, तो आपको पूरा नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसी भी फ्रॉड की स्थिति में तुरंत अपने बैंक और UPI ऐप को सूचित करें। इसके अलावा, वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए सरकार की साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना सबसे कारगर तरीका है।
