टैक्स का पेंच: गिफ्ट फ्री, पर कमाई पर टैक्स!
भारत में इनकम टैक्स कानून के तहत, माता-पिता से मिलने वाले गिफ्ट पर कोई टैक्स नहीं लगता, चाहे रकम कितनी भी हो। यह एक बड़ी राहत है। लेकिन, अगर इन गिफ्ट किए गए पैसों से कोई इनकम (जैसे इंटरेस्ट या डिविडेंड) जेनरेट होती है, तो यह मामला थोड़ा पेचीदा हो जाता है। नाबालिग बच्चों के मामले में, गिफ्ट वाली संपत्ति से होने वाली आय को पेरेंट्स की कुल इनकम में जोड़ दिया जाता है और उसी पर टैक्स लगता है। इसे 'क्लबिंग ऑफ इनकम' कहते हैं। हालांकि, यह नियम ज्यादातर नाबालिगों के लिए है। बालिग (एडल्ट) बच्चों के मामले में, गिफ्ट से हुई आय उनकी अपनी इनकम मानी जाती है और उन्हें उस पर अलग से टैक्स देना होता है।
डिजिटल गिफ्टिंग का बूम और डॉक्यूमेंटेशन का भूलना
आजकल UPI ने पैसों के लेन-देन को बेहद आसान बना दिया है। भारत में UPI ट्रांजैक्शन्स हर महीने अरबों की संख्या में हो रहे हैं। ऐसे में, पेरेंट्स का अपने बच्चों को पैसे भेजना एक आम बात हो गई है। इस डिजिटल सुविधा के कारण, लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि इन पैसों का ठीक से रिकॉर्ड रखना कितना जरूरी है, खासकर जब इन पैसों को कहीं निवेश करके इनकम जेनरेट की जा रही हो।
RBI का बड़ा कदम: हाई-वैल्यू UPI पेमेंट्स पर लगेगी रोक!
डिजिटल पेमेंट में धोखाधड़ी को रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कुछ नए नियम प्रस्तावित किए हैं। इनमें से एक बड़ा नियम यह है कि ₹10,000 से ऊपर के पर्सन-टू-पर्सन UPI ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे का डिले (देरी) लागू किया जा सकता है। इससे ग्राहकों को संदिग्ध पेमेंट को कैंसिल करने का मौका मिल सकेगा। यह कदम हाई-वैल्यू डिजिटल ट्रांजैक्शन्स पर रेगुलेटरी कंट्रोल बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अनडॉक्यूमेंटेड UPI गिफ्ट्स के टैक्स रिस्क
UPI के आसान इस्तेमाल से कई बार लोग यह मानने लगते हैं कि वे टैक्स नियमों का पालन कर रहे हैं। बिना किसी स्पष्ट गिफ्ट डीड या traceable बैंक ट्रांसफर के, टैक्स ऑडिट के दौरान टैक्स अथॉरिटीज आपसे फंड के सोर्स और उससे हुई कमाई के बारे में पूछ सकती हैं। अगर आप इन चीजों को साबित नहीं कर पाते हैं, तो आपको भारी पेनल्टी भी भुगतनी पड़ सकती है। आपकी हाई स्पेंडिंग और घोषित आय में बड़ा अंतर हमेशा टैक्स डिपार्टमेंट के लिए एक रेड फ्लैग होता है।
पारदर्शिता ही कुंजी है
जैसे-जैसे डिजिटल फाइनेंसेस बढ़ रहे हैं, पैसे के लेन-देन में पारदर्शिता पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है। पेरेंट्स द्वारा बच्चों को दी जाने वाली आर्थिक मदद और उससे होने वाली आय, दोनों का हिसाब रेगुलेटर्स को ध्यान में रखकर रखना होगा। डिजिटल पेमेंट सिस्टम लगातार विकसित हो रहा है और टैक्स डिपार्टमेंट भी डेटा एनालिटिक्स का भरपूर उपयोग कर रहा है। ऐसे में, किसी भी बड़ी मनी मूवमेंट का सही रिकॉर्ड रखना, भविष्य की समस्याओं से बचने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
