ULIP से पैसे निकालें या रुकें? 5 साल की लॉक-इन के बाद समझें सही रणनीति!

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AuthorAditya Rao|Published at:
ULIP से पैसे निकालें या रुकें? 5 साल की लॉक-इन के बाद समझें सही रणनीति!

यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) में 5 साल का लॉक-इन पीरियड खत्म होने पर पैसे निकालने का ख्याल आता है, लेकिन क्या यह सही समय है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि तुरंत निकासी से लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग के फायदे छूट सकते हैं।

5 साल के बाद ULIP से निकासी: क्या है सही फैसला?

यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) को लंबी अवधि के लिए बनाया गया है, जो लाइफ इंश्योरेंस और मार्केट-लिंक्ड निवेश दोनों का फायदा देता है। इसका एक खास फीचर 5 साल का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड है। जब यह पीरियड खत्म होता है, तो अक्सर निवेशक यह तय नहीं कर पाते कि निवेश जारी रखें या जमा हुई रकम निकाल लें। लेकिन, फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि 5 साल के बाद पैसा निकालना एक ऑटोमैटिक एग्जिट सिग्नल नहीं, बल्कि वेल्थ बनाने की शुरुआत होनी चाहिए।

शुरुआत के खर्चे का असर (Front-Loaded Costs)

ज़्यादातर ULIPs में शुरुआत में ही ज़्यादातर चार्जेज़ कट जाते हैं। इसमें मॉर्टेलिटी चार्जेज़, पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन फीस और कमीशन शामिल हैं। 5 साल के लॉक-इन के अंत तक, ये शुरुआती खर्चे आमतौर पर कवर हो जाते हैं और पॉलिसी इन्वेस्टमेंट ग्रोथ पर ज़्यादा फोकस करने लगती है। ऐसे में, लॉक-इन के तुरंत बाद पैसा निकालने से निवेशक उस दौर को मिस कर सकते हैं, जहाँ निवेश सबसे ज़्यादा असरदार होता है और कंपाउंडिंग के फायदे दिखने लगते हैं।

फंड की परफॉर्मेंस और टैक्स के फायदे

निकासी का फैसला लेने से पहले, निवेशकों को अपने ULIP फंड की परफॉर्मेंस की तुलना बेंचमार्क या दूसरे मार्केट-लिंक्ड निवेशों से करनी चाहिए। अगस्त 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग ULIP फंड्स ने 5 साल की अवधि में विभिन्न रिटर्न दिए हैं। उदाहरण के लिए, Pramerica Life Insurance के Wealth + Premier Large Cap Equity Fund ने 19.80% का CAGR दिया, जबकि Bandhan Life Insurance के iMaximize Plan - Opportunity Fund ने 16.10% का CAGR दर्ज किया। Bajaj Life Insurance और HDFC Life Insurance जैसी कंपनियों के मिड-कैप फंड्स ने भी 11.90% से 13.80% के बीच रिटर्न दिया है।

इसके अलावा, निवेशकों को अपनी पॉलिसी के टैक्स नियमों पर भी ध्यान देना चाहिए। मौजूदा भारतीय टैक्स नियमों के तहत, योग्य जीवन बीमा पॉलिसियों के मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम टैक्स-फ्री हो सकती है। अगर आप पैसे किसी ऐसे इंस्ट्रूमेंट में डालते हैं, जो टैक्स-एफिशिएंट नहीं है, तो ULIP से कमाए गए मुनाफे पर पानी फिर सकता है। यदि फंड लगातार अपने बेंचमार्क से कम प्रदर्शन कर रहा है, तो बाहर निकलना समझदारी हो सकती है, लेकिन ऐसा तभी करें जब पूंजी को तुरंत एक अच्छी तरह से डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में लगाया जाए ताकि मूल निवेश की समय-सीमा बनी रहे।

निवेशकों के लिए स्ट्रैटेजिक सोच

आखिरकार, निवेश में बने रहने या पैसा निकालने का फैसला आपकी पर्सनल फाइनेंशियल सिचुएशन पर निर्भर करना चाहिए। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि क्या यह प्लान अभी भी उनके लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों और रिस्क लेने की क्षमता के अनुरूप है। पॉलिसी होल्डर्स के लिए सबसे ज़रूरी है कि वे अपने फंड के लगातार प्रदर्शन पर नज़र रखें। सरेंडर करने का अनुरोध करने से पहले, अपनी लेटेस्ट एनुअल पॉलिसी स्टेटमेंट की समीक्षा करना उचित होगा ताकि वर्तमान कैश वैल्यू और निकासी के संभावित टैक्स प्रभावों को समझा जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.