UAE Expats की चमकी किस्मत! Dirham के आगे कमजोर पड़े Rupee, Peso; घर भेजें ज़्यादा पैसा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
UAE Expats की चमकी किस्मत! Dirham के आगे कमजोर पड़े Rupee, Peso; घर भेजें ज़्यादा पैसा
Overview

UAE में काम करने वाले expats के लिए एक बड़ा मौका आया है। भारतीय रुपया (Indian Rupee), पाकिस्तानी रुपया (Pakistani Rupee) और फिलिपिनो पेसो (Philippine Peso) में आई भारी कमजोरी के चलते, UAE Dirham के मुकाबले ये करेंसीज़ अपने निचले स्तर पर हैं। इसका सीधा मतलब है कि UAE से घर पैसे भेजने पर अब ज़्यादा रकम पहुँच रही है।

क्यों हो रहा है ऐसा?

यह स्थिति UAE Dirham की मजबूती और एशियाई करेंसीज़ पर चल रहे दबाव का नतीजा है। खास तौर पर, भारतीय रुपया वैश्विक दबाव और निवेशकों की बदलती सोच के चलते कमजोर हुआ है। वहीं, फिलिपिनो पेसो में घरेलू आर्थिक अनिश्चितता और धीमी ग्रोथ के कारण उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पाकिस्तानी रुपया भले ही हाल में कुछ स्थिर हुआ हो, पर यह अभी भी अपने ऐतिहासिक निचले स्तरों के करीब है। 30 जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 1 UAE Dirham के बदले ₹24.95 भारतीय रुपया, करीब 76.67 पाकिस्तानी रुपया और लगभग 15.98 फिलिपिनो पेसो मिल रहे हैं। ये दरें उस वक़्त की तुलना में काफी अच्छी हैं जब इन देशों की करेंसीज़ मज़बूत थीं।

करेंसीज़ के गिरने का आर्थिक असर

इस करेंसी गिरावट का सीधा असर भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इन देशों के लिए रेमिटेंस (remittance) यानी विदेश से भेजा गया पैसा विदेशी मुद्रा (foreign exchange) और परिवारों की आय का एक अहम जरिया है। मिसाल के तौर पर, पाकिस्तान को अकेले जनवरी 2025 में रेमिटेंस से करीब 3 अरब डॉलर मिले थे, जो विदेश में काम करने वाले नागरिकों के योगदान को दर्शाता है। UAE खुद एक बड़ा रेमिटेंस हब है, जहाँ से सालाना करीब 45 अरब डॉलर बाहर जाते हैं, क्योंकि यहाँ काम करने वाली आबादी का लगभग 88% हिस्सा प्रवासी (expatriates) हैं।

समझदारी से भेजें पैसा: एक्सपर्ट की सलाह

वित्तीय सलाहकार (Financial advisors) ऐसे समय में समझदारी से रेमिटेंस करने की सलाह देते हैं। हालाँकि मौजूदा एक्सचेंज रेट (exchange rate) फायदेमंद हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स बड़ी रकम एक साथ भेजने से बचने को कह रहे हैं। एक आम रणनीति यह है कि पैसे का कुछ हिस्सा अभी अच्छी दरों पर भेज दें और बाकी को भविष्य में दरों में होने वाले संभावित बदलावों के मद्देनज़र रोक लें। करेंसी मार्केट्स (currency markets) अस्थिर (volatile) होते हैं और इन पर ब्याज दरों, भू-राजनीतिक घटनाओं और निवेशकों के फ्लो का असर पड़ता है, इसलिए छोटी अवधि का अनुमान लगाना मुश्किल है। एक संतुलित तरीका अपनाना, जिसमें मौजूदा फायदे और भविष्य की संभावनाओं का ध्यान रखा जाए, सबसे बेहतर है।

expats के लिए रणनीतिक फैसले

भारतीय expats के लिए, रुपये के ऐतिहासिक निचले स्तरों के कारण उनकी खरीदने की क्षमता (purchasing power) बढ़ गई है, जिससे घर पैसे भेजना ज़्यादा किफायती हो गया है। पाकिस्तानी expats के लिए, रुपये की लगातार नरमी मूल्य का एक स्थिर अवसर प्रदान करती है, जो ज़रूरी घरेलू ज़रूरतों का समर्थन करती है। फिलिपिनो expats भी पेसो के मौजूदा दबाव से लाभान्वित हो सकते हैं, हालाँकि इसकी अस्थिरता, जो घरेलू आर्थिक और राजनीतिक कारकों से जुड़ी है, सावधानीपूर्वक निगरानी का सुझाव देती है। सभी expats के लिए सबसे अच्छी प्रथाओं में लाइव एक्सचेंज रेट की निगरानी करना, प्रतिस्पर्धी शुल्क के लिए मान्यता प्राप्त एक्सचेंज प्लेटफॉर्म का उपयोग करना और एकमुश्त राशि के बजाय आंशिक स्थानांतरण पर विचार करना शामिल है।

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