बढ़ते रीपेमेंट का बोझ, घट रही पैसों की फ्लेक्सिबिलिटी
अगर आपने होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या एजुकेशन लोन जैसे कई कर्ज़ ले रखे हैं, तो आपकी मासिक किस्तें लगातार बढ़ती जाएंगी। जब आपकी आय इन बढ़ती हुई कर्ज़ की किस्तों के हिसाब से नहीं बढ़ती, तो घर के ज़रूरी खर्चे जैसे किराया, इंश्योरेंस और बचत के लिए पैसे कम पड़ने लगते हैं। इससे आप पैसों के मामले में और भी ज़्यादा दबाव में आ जाते हैं और आपकी आर्थिक आज़ादी काफी कम हो जाती है।
ऊँचा डेट-टू-इनकम रेशियो, नए लोन मिलने में मुश्किल
बैंक और लेंडर्स (Lenders) आपकी लोन चुकाने की क्षमता को डेट-टू-इनकम (DTI) रेशियो से देखते हैं। यह बताता है कि आपकी कुल मासिक आय का कितना हिस्सा कर्ज़ चुकाने में जा रहा है। जब यह रेशियो ज़्यादा होता है, जो कि कई सारे लोन लेने का एक आम नतीजा है, तो यह भविष्य में और ज़्यादा लोन लेने में एक बड़ी रुकावट बन सकता है। ऐसे लोग जिनका क्रेडिट रिकॉर्ड हमेशा अच्छा रहा है, उन्हें भी नए लोन मिलने में दिक्कत हो सकती है क्योंकि लेंडर्स को लग सकता है कि वे कर्ज़ चुकाने में सक्षम नहीं हैं।
कर्ज़ के जाल में फंसा क्रेडिट स्कोर
सिर्फ ज़्यादा लोन होना आपके क्रेडिट स्कोर को खराब नहीं करता, लेकिन समय पर किश्तें चुकाना सबसे ज़रूरी है। अगर आप हर लोन की किश्त समय पर भरते हैं, तो यह आपकी क्रेडिट-वर्दीनेस (Creditworthiness) बढ़ाता है। लेकिन, अगर किसी एक भी लोन की एक किश्त भी चूक जाती है, तो यह तुरंत आपके स्कोर पर बुरा असर डालती है और इसे लंबे समय तक खराब कर सकती है। साथ ही, कम समय में कई सारे लोन के लिए अप्लाई करने से आपके क्रेडिट रिपोर्ट पर कई 'हार्ड इंक्वायरी' (Hard Inquiries) हो सकती हैं, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर अस्थायी रूप से गिर सकता है।
कर्ज़दारों के लिए इमरजेंसी फंड की ज़रूरत
जो लोग कई सारे लोन मैनेज कर रहे हैं, वे आर्थिक रूप से ज़्यादा कमज़ोर होते हैं। अगर अचानक से कमाई कम हो जाए या कोई बड़ा खर्चा आ जाए, तो बिना पैसों के बड़े बफर (Buffer) के इन्हें संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है। अगर आपके पास ठीक-ठाक इमरजेंसी फंड नहीं है, तो किसी भी आर्थिकThe financial exigency (आर्थिकThe financial exigency) में लोन की किश्तें चुकाना नामुमकिन हो सकता है। इसलिए, ज़्यादा कर्ज़ लेने से पहले एक फाइनेंशियल सेफ्टी नेट बनाना बहुत ज़रूरी है। रिसर्च से पता चलता है कि जिन लोगों के पास अच्छा इमरजेंसी फंड होता है, वे आर्थिक मंदी और अचानक आने वाले निजी आर्थिक संकटों का सामना बेहतर तरीके से कर पाते हैं, जिससे उनका क्रेडिट स्टेटस सुरक्षित रहता है। लेंडिंग स्पेस (Lending space) में कंपटीटर्स (Competitors) अक्सर इन जोखिमों को कम करने के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग टूल्स (Financial planning tools) और एजुकेशन (Education) के महत्व पर जोर देते हैं।
