क्या आप भी म्यूचुअल फंड में ज्यादा SIPs खोल रहे हैं? ज़रा संभल जाएं! ज़्यादा स्कीम्स का मतलब ज़्यादा मुनाफा नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में ओवरलैप और ओवर-डाइवर्सिफिकेशन का खतरा है। ऐसे में, सिर्फ गिनती बढ़ाने की बजाय सही एसेट एलोकेशन और अलग-अलग निवेश के ठिकानों पर ध्यान देना ज़रूरी है।
क्या है ओवर-डाइवर्सिफिकेशन का जाल?
बहुत से भारतीय निवेशक मानते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) खोलने से रिस्क कम होता है और रिटर्न बढ़ता है। लेकिन, असलियत इससे बिल्कुल अलग है। ज़्यादा म्यूचुअल फंड स्कीम्स में पैसा लगाने से आप 'ओवर-डाइवर्सिफिकेशन' के जाल में फंस सकते हैं। जब आपके पोर्टफोलियो में बहुत ज़्यादा फंड्स हो जाते हैं, तो अक्सर कई स्कीम्स एक ही तरह के स्टॉक्स या एक जैसी स्ट्रैटेजी में निवेश करने लगती हैं। इसे 'पोर्टफोलियो ओवरलैप' कहते हैं।
पोर्टफोलियो ओवरलैप का असली खतरा
ओवर-डाइवर्सिफिकेशन आपके संभावित मुनाफे को कम कर सकता है और रिस्क को बढ़ा सकता है। मान लीजिए, आपने एक ही कैटेगरी में कई फंड्स (जैसे लार्ज-कैप या फ्लेक्सी-कैप) ले रखे हैं। तो इस बात की बहुत ज़्यादा संभावना है कि ये सभी फंड्स उन्हीं टॉप स्टॉक्स में पैसा लगा रहे हों जो सबसे ज़्यादा चल रहे हैं। इससे आपको लगेगा कि आपका पैसा डाइवर्सिफाई हो गया है, लेकिन असल में आप कुछ चुनिंदा कंपनियों में ही अपना एक्सपोजर (exposure) दोहरा रहे हैं। जब दो स्कीम्स के बीच ओवरलैप 40% से 50% से ज़्यादा हो जाता है, तो समझ लीजिए कि नया फंड जोड़ने का कोई खास फायदा नहीं हो रहा है।
एक संतुलित पोर्टफोलियो कैसे बनाएं?
लंबी अवधि में वेल्थ बनाने के लिए नए फंड ऑफर्स (NFOs) या ट्रेंडिंग थीम्स के पीछे भागने की बजाय एक अनुशासित तरीका अपनाना ज़्यादा फायदेमंद है। एक्सपर्ट्स की मानें तो आपके पोर्टफोलियो में फंड्स की सही संख्या आपके निवेश corpus (पूंजी) के साइज पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, अगर आप हर महीने ₹10,000 से ₹15,000 का छोटा निवेश कर रहे हैं, तो 4 से 6 फंड्स काफी हो सकते हैं। वहीं, बड़े पोर्टफोलियो में ज़्यादा फंड्स भी रखे जा सकते हैं। इक्विटी पोर्टफोलियो के लिए एक सामान्य सुझाव है कि मार्केट कैप के हिसाब से एसेट एलोकेशन (asset allocation) करें: 55% लार्ज-कैप, 25% मिड-कैप और 20% स्मॉल-कैप में निवेश करें।
फालतू स्कीम्स की पहचान
किसी भी निवेशक के लिए एक आसान टेस्ट यह है कि वह खुद से पूछे: क्या मेरे पोर्टफोलियो का हर फंड एक खास मकसद पूरा कर रहा है? अगर आप यह नहीं बता पा रहे कि कोई खास फंड आपके पोर्टफोलियो में क्यों है, या अगर वह आपके मौजूदा फंड्स की तरह ही सेक्टर में कंसंट्रेशन (concentration) या इन्वेस्टमेंट स्टाइल रखता है, तो शायद उसे समेटने (consolidate) का समय आ गया है। निवेशकों को बाजार के छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव पर रिएक्ट करने की गलती से बचना चाहिए, जैसे कि करेक्शन के दौरान पैनिक-सेलिंग (panic-selling) करना या किसी भी नए फंड लॉन्च में आंख मूंदकर निवेश करना।
पोर्टफोलियो रिव्यू के कदम
कोई भी नया SIP शुरू करने से पहले, अपने मौजूदा निवेशों में सेक्टर कंसंट्रेशन और पोर्टफोलियो ओवरलैप की जांच करें। अगर आपके मौजूदा फंड्स पहले से ही अलग-अलग मार्केट सेगमेंट्स और स्टाइल्स को कवर करते हैं, तो नया फंड जोड़ने के बजाय अपने अच्छा प्रदर्शन कर रहे मौजूदा फंड्स में SIP की राशि बढ़ाना ज़्यादा फायदेमंद होता है। समय-समय पर रीबैलेंसिंग (rebalancing) करना और यह सुनिश्चित करना कि आपका कुल एलोकेशन आपके रिस्क टॉलरेंस (risk tolerance) और फाइनेंशियल गोल्स (financial goals) के मुताबिक हो, बहुत ज़रूरी है। यह ट्रैक करना कि आपका कितना पोर्टफोलियो कुछ ही सेक्टर्स या कंपनियों में केंद्रित है, आपको सचमुच डाइवर्सिफाई निवेश बेस बनाए रखने में मदद कर सकता है।
