पढ़ाई का बढ़ता खर्च: एक बड़ा संकट
पश्चिमी देशों के बड़े विश्वविद्यालयों में चार साल की अंडरग्रेजुएट डिग्री की कुल लागत ₹2 करोड़ के पार जा चुकी है। ग्लोबल एजुकेशन इन्फ्लेशन (Education Inflation) हर साल 5-7% की दर से बढ़ रहा है, जो पारंपरिक बचत योजनाओं (Traditional Savings Schemes) की कमाई क्षमता को मात दे रहा है। इसका नतीजा यह है कि जब बच्चों के एडमिशन का समय आता है, तो माता-पिता के पास पर्याप्त फंड नहीं होता।
करेंसी की अस्थिरता का खेल
बच्चों की पढ़ाई के लिए विदेशों में अक्सर डॉलर (USD) या पाउंड (GBP) में भुगतान करना पड़ता है। लेकिन अगर आप भारतीय रुपये (INR) में बचत कर रहे हैं, तो आप अनजाने में अपनी घरेलू करेंसी पर बड़ा दांव खेल रहे हैं। जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो पढ़ाई का खर्च और बढ़ जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए, एक्सपर्ट्स अब पोर्टफोलियो में इंटरनेशनल इक्विटी म्यूचुअल फंड (International Equity Mutual Funds) या फीडर फंड (Feeder Funds) को शामिल करने की सलाह दे रहे हैं। ये फंड करेंसी डेप्रिसिएशन (Currency Depreciation) के खिलाफ एक नेचुरल हेज (Natural Hedge) का काम करते हैं।
रिटायरमेंट पर खतरा
बच्चों की पढ़ाई के लिए रिटायरमेंट के पैसों का इस्तेमाल करना एक खतरनाक ट्रेंड है। घर खरीदने या बिजनेस में निवेश के विपरीत, एजुकेशन डिग्री को गिरवी रखकर पैसे नहीं निकाले जा सकते। अगर बच्चा अच्छी नौकरी हासिल नहीं कर पाता है, तो यह पैसा वापस नहीं मिलेगा। कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए अपने रिटायरमेंट फंड से पैसे निकालते हैं, जिससे भविष्य में लिक्विडिटी (Liquidity) का संकट खड़ा हो जाता है। अगर आपकी इन्वेस्टमेंट होराइजन (Investment Horizon) दस साल से कम है, तो हाई-बीटा इक्विटी मार्केट (High-Beta Equity Market) पर निर्भर रहना और भी जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि मार्केट में गिरावट से आपको भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में, एजुकेशन लोन को रिटायरमेंट कैपिटल को बचाने का एक टैक्स-एडवांटेज्ड (Tax-Advantaged) तरीका समझना चाहिए।
पढ़ाई के फंड का पोर्टफोलियो आर्किटेक्चर
इस फंडिग गैप को भरने के लिए, शुरुआती सालों में कंजर्वेटिव (Conservative) होकर पैसा बचाने के बजाय ग्रोथ-ओरिएंटेड एसेट एलोकेशन (Growth-Oriented Asset Allocation) अपनाना होगा। रेगुलर SIP स्ट्रक्चर (SIP Structure) से आप इक्विटी रिस्क प्रीमियम (Equity Risk Premium) का फायदा उठा सकते हैं, जो एजुकेशन इन्फ्लेशन और करेंसी डेप्रिसिएशन दोनों को मात देने के लिए जरूरी है। जैसे-जैसे टारगेट डेट नजदीक आए, पोर्टफोलियो को लिक्विड और स्टेबल एसेट्स (Liquid, Stable Assets) में शिफ्ट करना महत्वपूर्ण हो जाता है। अगर सही समय पर डी-रिस्किंग (De-risking) नहीं की गई, तो मार्केट करेक्शन (Market Correction) के दौरान भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, ठीक उसी समय जब ट्यूशन फीस का भुगतान करना हो।
