सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करने में अगर आप केवल 5 साल की देरी करते हैं, तो यह आपके रिटायरमेंट फंड पर भारी पड़ सकता है। आंकड़े बताते हैं कि 25 साल की उम्र से निवेश शुरू करने पर आप **₹6.4 करोड़** का फंड बना सकते हैं, जबकि 5 साल की देरी से यह कॉर्पस **₹3 करोड़** तक कम हो सकता है।
लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन का गणित यह साबित करता है कि निवेश की गई रकम से ज्यादा जरूरी 'समय' होता है। यदि आप 25 साल की उम्र में ₹10,000 की मासिक SIP शुरू करते हैं और 12% का अनुमानित रिटर्न मानते हैं, तो 60 साल की उम्र तक आपका फंड ₹6.4 करोड़ हो सकता है। यदि यही निवेश 30 साल की उम्र में शुरू किया जाए, तो फंड गिरकर ₹3.5 करोड़ रह जाता है। यानी सिर्फ 5 साल की देरी से आप ₹3 करोड़ का नुकसान झेलते हैं, जबकि मूल निवेश में अंतर सिर्फ ₹6 लाख का होता है।
कैच-अप करने की भारी कीमत
देरी से निवेश शुरू करने पर लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। 30 साल की उम्र से ₹6.4 करोड़ का लक्ष्य पाने के लिए आपको अपनी मासिक बचत को बढ़ाकर ₹18,000 से ₹18,500 के बीच करना होगा। यानी, खोए हुए समय की भरपाई के लिए आपको अपनी बचत में 80% का इजाफा करना पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ कंपाउंडिंग का असर कम होने लगता है। उदाहरण के लिए, 45 साल की उम्र में शुरू की गई SIP 60 की उम्र तक केवल ₹50 लाख का ही फंड तैयार कर पाती है।
रिस्क और महंगाई का फैक्टर
ये आंकड़े 12% के वार्षिक रिटर्न पर आधारित हैं, लेकिन मार्केट की चाल कभी भी सीधी रेखा में नहीं होती। इक्विटी और म्यूचुअल फंड में बाजार का उतार-चढ़ाव और सेक्टर का रिस्क हमेशा बना रहता है। इसके अलावा, भविष्य में महंगाई (Inflation) की मार भी पड़ती है। आज का ₹6.4 करोड़, 30 साल बाद उतना पावरफुल नहीं होगा, इसलिए निवेश का लक्ष्य हमेशा महंगाई को ध्यान में रखकर ही तय करना चाहिए।
देर से शुरू करने वालों के लिए उपाय
अगर आप निवेश शुरू करने में देरी कर चुके हैं, तो 'स्टेप-अप SIP' (Step-up SIP) एक बेहतरीन हथियार है। इसमें आप हर साल अपनी सैलरी बढ़ने के साथ निवेश राशि को 10% से 15% तक बढ़ा सकते हैं। अपने वित्तीय लक्ष्यों और वर्तमान निवेश के बीच के अंतर की नियमित समीक्षा करना ही वेल्थ क्रिएशन की कुंजी है।
