Spousal Gifts पर Tax के नियम: क्या आप भी 'Clubbing' के जाल में फंस रहे हैं?

PERSONAL-FINANCE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Spousal Gifts पर Tax के नियम: क्या आप भी 'Clubbing' के जाल में फंस रहे हैं?

जीवनसाथी को गिफ्ट देना टैक्स फ्री हो सकता है, लेकिन उस पैसे से होने वाली कमाई पर 'क्लबिंग' (Clubbing) के नियम लागू होते हैं। कमाई को अपनी इनकम में जोड़ना न भूलने पर आपको आयकर विभाग के नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।

भारत में पति-पत्नी के बीच संपत्ति या पैसे का ट्रांसफर गिफ्ट के तौर पर करना काफी आम है और इस पर कोई गिफ्ट टैक्स नहीं लगता। लेकिन, असली पेंच तब फंसता है जब उस गिफ्ट की गई रकम से कमाई शुरू होती है। आयकर कानून के तहत, ऐसी आय को उस व्यक्ति की इनकम माना जाता है जिसने गिफ्ट दिया था, इसे ही 'क्लबिंग' प्रावधान कहा जाता है।

कैसे काम करता है क्लबिंग का गणित?

टैक्स अथॉरिटीज यह मानती हैं कि गिफ्ट की गई पूंजी पर होने वाली पहली कमाई (Primary Income) मूल मालिक की है। उदाहरण के लिए, यदि पति ने पत्नी को पैसे दिए और पत्नी ने उस पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराई, तो मिलने वाला ब्याज पति की ही इनकम में जोड़ा जाएगा।

निवेशकों को दो तरह की कमाई के बीच फर्क समझना होगा:

  1. फर्स्ट-जनरेशन इनकम: गिफ्ट की गई राशि पर सीधे होने वाली कमाई, जो डोनर की इनकम में क्लब होगी।
  2. सेकंड-जनरेशन इनकम: अगर पत्नी उसी ब्याज या मुनाफे को कहीं और निवेश कर देती है, तो उससे होने वाली आय पत्नी की ही मानी जाएगी, बशर्ते इसका रिकॉर्ड अलग रखा गया हो।

रिकॉर्ड रखना क्यों है जरूरी?

आजकल AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS के जरिए टैक्स विभाग हर ट्रांजैक्शन पर बारीक नजर रखता है। अगर आपकी इनकम के दावों और सरकारी डेटा में अंतर मिलता है, तो आपको तुरंत नोटिस मिल सकता है।

नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी

अगर आप क्लबिंग प्रोविजन्स को सही से रिपोर्ट नहीं करते हैं, तो आपको टैक्स के साथ भारी ब्याज देना पड़ सकता है। साथ ही, Income Tax Act की धारा 270A के तहत गलत रिपोर्टिंग के लिए पेनल्टी भी लग सकती है। विभाग के पास अब डेटा एनालिटिक्स के जरिए वित्तीय लेनदेन को ट्रैक करने की एडवांस तकनीक है, इसलिए पारदर्शिता ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि गिफ्ट की तारीख, राशि और निवेश के हर ट्रांजैक्शन का पूरा ब्यौरा रखें। इससे टैक्स फाइलिंग के दौरान न केवल कन्फ्यूजन दूर होगा, बल्कि आप अपनी सही टैक्स स्लैब के अनुसार लायबिलिटी भी कैलकुलेट कर पाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.