इनकम टैक्स फाइलिंग की 31 अगस्त, 2026 की डेडलाइन नजदीक है। फ्रीलांसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए जरूरी है कि वे अपनी कमाई को 'Profits and Gains of Business or Profession' (PGBP) के तहत सही ढंग से दिखाएं।
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की डेडलाइन 31 अगस्त, 2026 नजदीक है। गिग इकोनॉमी में काम करने वाले प्रोफेशनल जैसे कंटेंट क्रिएटर्स, डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और फ्रीलांसर्स के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण है। टैक्स अथॉरिटीज इन दिनों प्रोफेशनल कमाई और सामान्य प्राप्तियों के बीच के अंतर पर कड़ी नजर रख रही हैं।
फॉर्म का चुनाव और टैक्स स्कीम
ज्यादातर फ्रीलांसर्स की कमाई 'Profits and Gains of Business or Profession' (PGBP) हेड के तहत आती है। जो लोग प्रॉपर बुक्स ऑफ अकाउंट्स रखते हैं, वे आमतौर पर ITR-3 भरते हैं। वहीं, जो सेक्शन 44ADA के तहत प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम चुनते हैं, वे ITR-4 भरने के पात्र हो सकते हैं। इस स्कीम का फायदा यह है कि ₹75 लाख तक की ग्रॉस रिसिप्ट्स वाले प्रोफेशनल अपनी कमाई का 50% हिस्सा ही टैक्सेबल प्रॉफिट मान सकते हैं। हालांकि, इसे चुनने से पहले यह जांच लें कि आपका काम इस एक्ट की कैटेगरी में आता है या नहीं।
बिजनेस खर्चों पर सख्ती
टैक्स अधिकारी अब बिजनेस खर्चों के दावों (Expense Claims) की बारीकी से जांच कर रहे हैं। बिना ठोस सबूत के बिजली, पानी या यात्रा के पूरे खर्च को बिजनेस एक्सपेंस दिखाना विवाद पैदा कर सकता है। केवल वही खर्च दिखाएं जो वास्तव में बिजनेस के लिए इस्तेमाल हुए हों। डॉक्यूमेंटेशन न होने पर टैक्स स्क्रूटनी के दौरान ये दावे खारिज हो सकते हैं।
GST और TDS का चक्कर
सिर्फ इनकम टैक्स ही काफी नहीं है, GST का पालन करना भी जरूरी है। अगर आपका टर्नओवर ₹20 लाख (कुछ राज्यों में ₹10 लाख) से ज्यादा है, तो GST रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसके अलावा, ब्रांड कोलैबोरेशन और फ्रीबीज पर सेक्शन 194R के तहत TDS के नियमों को समझना भी जरूरी है।
नोटिस से कैसे बचें?
अपना डेटा 'Annual Information Statement' (AIS) और 'Form 26AS' से जरूर मिलाएं। अगर आपके रिटर्न और इन ऑफिशियल स्टेटमेंट में अंतर मिला, तो इनकम टैक्स का नोटिस मिल सकता है। डेडलाइन मिस होने पर ₹5,000 तक की लेट फीस और बकाया टैक्स पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
