फाइनेंशियल ईयर (FY) 2025-26 के दौरान नौकरी बदलने वाले सैलरीड लोगों को असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय खास सावधानी बरतनी होगी। दोनों जगह की कमाई को सही ढंग से जोड़ना और टैक्स डिडक्शन का दावा सोच-समझकर करना जरूरी है, वरना इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस आ सकता है और रिफंड में देरी हो सकती है।
क्या हुआ
अगर आपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में एक से ज्यादा कंपनियों में काम किया है, तो असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय आपको अतिरिक्त सतर्क रहना होगा। जब कोई व्यक्ति एक ही साल में दो अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करता है, तो दोनों स्रोतों से हुई कमाई को एक ही टैक्स रिटर्न में जोड़ना अनिवार्य है। अक्सर लोग इन दोनों इनकम को ठीक से जोड़ नहीं पाते या गलती से दोनों जगह से हाउस रेंट अलाउंस (HRA) या इन्वेस्टमेंट डिडक्शन जैसे टैक्स बेनिफिट्स का दावा कर लेते हैं। ये गलतियाँ इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजरों में आ सकती हैं, जिससे जांच, टैक्स डिमांड नोटिस या रिफंड मिलने में काफी देरी हो सकती है।
इनकम कंसॉलिडेशन क्यों है जरूरी?
आयकर विभाग (Income Tax Department) उम्मीद करता है कि करदाता अपनी कुल सालाना सैलरी को एक ही आय के रूप में मानें। जब कोई करदाता नौकरी बदलता है, तो नया एम्प्लॉयर केवल उन्हीं की कंपनी से दिए गए वेतन के आधार पर टैक्स की गणना कर सकता है, जब तक कि कर्मचारी पिछली नौकरी का विवरण न दे। कुल सालाना आय पर सही TDS (Tax Deducted at Source) कैलकुलेट हो, इसके लिए कर्मचारियों को अपने वर्तमान एम्प्लॉयर को फॉर्म 12B जमा करने की उम्मीद की जाती है। ऐसा न करने पर, दोनों नौकरियों में काटा गया टैक्स आपकी असल टैक्स देनदारी से कम हो सकता है, और आपको ITR फाइलिंग के दौरान बाकी का टैक्स खुद भरना पड़ सकता है।
डबल डिडक्शन का खतरा
एक से ज्यादा एम्प्लॉयर वाले लोगों के लिए एक और बड़ा खतरा एग्जम्प्शन (छूट) के डबल क्लेम का है। हाउस रेंट अलाउंस (HRA) एग्जम्प्शन या सेक्शन 80C के तहत डिडक्शन जैसी छूटों की सालाना सीमा होती है। अगर कोई करदाता गलती से इन छूटों का दावा दोनों एम्प्लॉयर के माध्यम से करता है, तो उनके टैक्स रिकॉर्ड में एक विसंगति पैदा होती है। टैक्स नियमों के अनुसार, ये छूटें पूरे फाइनेंशियल ईयर में केवल एक बार ही क्लेम की जा सकती हैं। डबल क्लेम टैक्स अथॉरिटीज द्वारा आसानी से पकड़े जाते हैं, जिससे आपके रिटर्न पर सवाल उठने की संभावना बढ़ जाती है।
डॉक्यूमेंट्स का मिलान क्यों जरूरी है?
फाइलिंग प्रक्रिया में सटीकता के लिए डॉक्यूमेंट्स का मिलान बहुत महत्वपूर्ण है। करदाताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके ITR में बताई गई सैलरी का आंकड़ा उनके फॉर्म 16, फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में दिख रहे डेटा से मेल खाता हो। AIS और Taxpayer Information Summary (TIS) विभाग के लिए मुख्य रेफरेंस पॉइंट होते हैं। व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट की गई सैलरी और इन ऑफिशियल स्टेटमेंट्स में उपलब्ध डेटा के बीच कोई भी अंतर अक्सर ऑटोमेटेड टैक्स नोटिस को ट्रिगर करता है। सबमिट बटन दबाने से पहले इन्वेस्टमेंट प्रूफ, बैंक इंटरेस्ट और TDS क्रेडिट का इन ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स से मिलान करना, फाइलिंग के बाद की जटिलताओं से बचने का एक स्टैंडर्ड तरीका है।
आगे क्या देखना है?
नौकरी बदलने वाले करदाताओं को इस साल के लिए अपने सभी पिछले एम्प्लॉयर से फॉर्म 16 इकट्ठा करने पर ध्यान देना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात सभी स्रोतों से आय को शामिल करने के बाद टैक्स देनदारी की अंतिम गणना है। यदि टैक्स की कमी पाई जाती है, तो ब्याज पेनल्टी से बचने के लिए रिटर्न फाइल करने से पहले इसे सेल्फ-असेसमेंट टैक्स के रूप में भुगतान किया जाना चाहिए। निवेशकों और सैलरीड प्रोफेशनल्स को भी इनकम टैक्स पोर्टल से आधिकारिक ITR फॉर्म और यूटिलिटी अपडेट की निगरानी करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे मल्टीपल सैलरी हेड्स की रिपोर्टिंग के लिए सही एनेक्सचर का उपयोग कर रहे हैं।
