भारतीय टैक्स अथॉरिटीज अब प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन डेटा को इनकम टैक्स फाइलिंग के साथ मैच कर रही हैं। अगर आपकी ज्वाइंट प्रॉपर्टी में मालिकाना हक और निवेश का तालमेल नहीं बैठा, तो आपको विभाग से नोटिस मिल सकता है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब डेटा-ड्रिवन अप्रोच अपना रहा है, जिसके तहत प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच की जा रही है। विभाग अब स्टेट रजिस्ट्रार ऑफिस के डेटा को आपके AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS के साथ लिंक कर रहा है। इस डिजिटल तालमेल से अधिकारी यह आसानी से पता लगा सकते हैं कि प्रॉपर्टी में दर्ज नाम और निवेश करने वाले व्यक्ति की कमाई में कितना अंतर है।
फंड्स का सबूत देना होगा जरूरी
पहले परिवार के बीच प्रॉपर्टी के लेन-देन को निजी मामला मान लिया जाता था, लेकिन अब हर निवेश का 'फंड ट्रेल' होना अनिवार्य है। अगर किसी प्रॉपर्टी में कई नाम हैं, तो हर व्यक्ति को अपने हिस्से के पैसे का स्रोत बताना होगा। यदि निवेश आपकी घोषित इनकम से मेल नहीं खाता, तो आपका ट्रांजैक्शन ऑडिट के लिए फ्लैग किया जा सकता है।
बेनामी प्रॉपर्टी एक्ट का खतरा
अगर किसी व्यक्ति का नाम डीड में है, लेकिन उसने कोई पैसा नहीं लगाया है, तो विभाग इसे Prohibition of Benami Property Transactions Act के दायरे में ला सकता है। ITAT (Income Tax Appellate Tribunal) के हालिया फैसलों ने यह साफ कर दिया है कि टैक्स बेनेफिट्स केवल उसी को मिलेंगे जिसने असल में पैसा चुकाया है, न कि उसे जिसका नाम सिर्फ कागजों पर है।
क्लबिंग प्रोविजन्स से रहें सावधान
अगर आपने पत्नी या नाबालिग बच्चों के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदी है या उन्हें गिफ्ट दी है, तो उससे होने वाली कमाई आपकी कुल इनकम में जुड़ सकती है (क्लबिंग प्रोविजन्स)। बिना किसी फॉर्मल एग्रीमेंट या गिफ्ट डीड के ट्रांजैक्शन करने पर टैक्स असेसमेंट के दौरान भारी मुसीबत हो सकती है।
खुद को कैसे बचाएं?
टैक्स रिस्क को कम करने के लिए एक क्लियर ऑडिट ट्रेल बनाए रखें:
- निवेशक के बैंक अकाउंट से सेलर को गए पैसों का पूरा रिकॉर्ड रखें।
- यदि परिवार के किसी सदस्य को पैसे दिए हैं, तो उसे लोन एग्रीमेंट या गिफ्ट डीड के जरिए डॉक्यूमेंट करें।
- सुनिश्चित करें कि आपके सभी फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स और प्रॉपर्टी के कागजात पूरी तरह ट्रांसपेरेंट हों।
