रिटायरमेंट के बाद रेगुलर कैश फ्लो के लिए Systematic Withdrawal Plan (SWP) एक बेहतरीन विकल्प है। हालांकि, अपनी जमा पूंजी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए बाजार के उतार-चढ़ाव और महंगाई के बीच सही तालमेल बिठाना बेहद जरूरी है।
SWP क्या है और यह क्यों खास है?
Systematic Withdrawal Plan यानी SWP उन निवेशकों के लिए एक शानदार टूल है जो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बजाय म्यूचुअल फंड से हर महीने या तिमाही एक निश्चित राशि निकालना चाहते हैं। FD में जहां ब्याज दर पहले से तय होती है, वहीं SWP में आपके बाकी बचे पैसे मार्केट में निवेशित रहते हैं, जिससे महंगाई को मात देने वाला रिटर्न मिलने की संभावना बनी रहती है।
'सीक्वेंस ऑफ रिटर्न्स' रिस्क से कैसे बचें?
SWP में सबसे बड़ी चुनौती 'सीक्वेंस ऑफ रिटर्न्स' रिस्क की होती है। यदि रिटायरमेंट के तुरंत बाद बाजार में बड़ी गिरावट आ जाए और आप उसी समय पैसा निकालें, तो आपकी पूंजी बहुत तेजी से खत्म हो सकती है। इससे बचने का तरीका है 'लिक्विड बफर' बनाना। अपने खर्चों के लिए कुछ पैसा शॉर्ट-टर्म डेट फंड या सेविंग्स अकाउंट में रखें, ताकि मार्केट गिरने पर आपके मुख्य इक्विटी पोर्टफोलियो को रिकवर होने का मौका मिल सके।
महंगाई और टैक्स का गणित
आज की जरूरत के हिसाब से लिया गया पैसा 5-10 साल बाद कम पड़ सकता है, इसलिए समय के साथ अपनी विड्रॉल राशि को महंगाई के अनुसार एडजस्ट करना न भूलें। टैक्स के लिहाज से भी SWP काफी कारगर है। इसमें पूरा विड्रॉल टैक्सेबल नहीं होता, बल्कि केवल उन यूनिट्स के मुनाफे (Capital Gains) पर ही टैक्स लगता है जिन्हें आपने रिडीम किया है।
सालाना रिव्यू है जरूरी
SWP 'सेट एंड फॉरगेट' (Set and Forget) मॉडल नहीं है। आपको साल में कम से कम एक बार अपने पोर्टफोलियो की परफॉर्मेंस और अपनी जरूरतों की समीक्षा जरूर करनी चाहिए, ताकि आप अपने फाइनेंशियल गोल के साथ ट्रैक पर बने रहें।
