Stock Loans: सस्ता लोन, बड़ा धोखा! जानिए क्यों शेयर पर लिया कर्ज बन सकता है आपकी बर्बादी

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AuthorMehul Desai|Published at:
Stock Loans: सस्ता लोन, बड़ा धोखा! जानिए क्यों शेयर पर लिया कर्ज बन सकता है आपकी बर्बादी
Overview

शेयरों पर लोन (Loans Against Securities) अक्सर कम ब्याज दर (interest rate) और तुरंत कैश (cash) की सुविधा देते हैं, लेकिन इसमें एक बड़ा जोखिम छिपा है। अगर बाजार गिरा, तो लोन देने वाली कंपनी आपके इन्वेस्टमेंट को नुकसान में बेचकर आपकी पूरी जमा-पूंजी खत्म कर सकती है।

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यह लोन, जिसे 'लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज' (LAS) भी कहा जाता है, आम तौर पर 8% से 15% सालाना ब्याज दर पर मिलते हैं। यह अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन (unsecured personal loan) की 10% से 30% की दरों से काफी कम है। उधार लेने वाले अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो को कोलैटरल (collateral) के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। लोन देने वाली कंपनियां लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेश्यो के हिसाब से तय सीमा तक लोन देती हैं, जो आमतौर पर गिरवी रखे गए एसेट्स (assets) के मार्केट वैल्यू का 50% से 80% तक होता है। शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण, इन पर LTV रेश्यो और भी कम रखा जाता है। यह कोलैटरल जहां आकर्षक रेट दिलवाता है, वहीं लोन का रिस्क आपके एसेट्स के परफॉरमेंस से सीधे जुड़ जाता है।

जब कोलैटरल की वैल्यू एक तय लेवल से नीचे गिर जाती है, तो लोन देने वाली कंपनियां ' मार्जिन कॉल ' (margin call) जारी करती हैं। इसमें उधार लेने वाले को यह पैसा या अतिरिक्त सिक्योरिटीज जमा करने के लिए कहा जाता है ताकि लोन LTV रेश्यो के अंदर आ जाए। उधार लेने वालों के पास अक्सर बहुत कम समय, आमतौर पर कुछ वर्किंग डेज से लेकर एक हफ्ते का, होता है। अगर इस मार्जिन कॉल को पूरा नहीं किया गया, तो लोन देने वाली कंपनी को यह अधिकार मिल जाता है कि वह उधार लेने वाले की गिरवी रखी गई सिक्योरिटीज को बेचकर लोन की बाकी रकम वसूल कर सके। यह फोर्स लिक्विडेशन (forced liquidation) उधार लेने वाले की मर्जी के खिलाफ हो सकता है, और अक्सर यह सबसे खराब समय पर होता है, जिससे भारी कैपिटल लॉस (capital loss) हो सकता है। यह निवेशक की उस रणनीति के बिल्कुल उलट है जिसमें वह मार्केट में गिरावट आने पर भी अपने निवेश को बनाए रखता है।

सिक्योरिटीज-बैंक्ड लेंडिंग का सबसे बड़ा खतरा यह है कि उधार लेने वाला अपने एसेट्स का कंट्रोल खो देता है। भले ही कम ब्याज दर आकर्षक लगे, यह संभावित भारी कैपिटल लॉस की तुलना में एक भ्रामक आंकड़ा हो सकता है। फोर्स सेलिंग का मतलब है कि मार्केट में मामूली गिरावट भी उधार लेने वाले को एसेट्स को भारी डिस्काउंट पर बेचने पर मजबूर कर सकती है। इससे जो नुकसान होता है, वह न केवल बचाए गए ब्याज को खत्म कर देता है, बल्कि मूल लोन राशि से भी अधिक हो सकता है। पर्सनल लोन में मुख्य जोखिम इनकम की समस्या के कारण डिफॉल्ट (default) का होता है, लेकिन LAS उधार लेने वाले को अप्रत्याशित मार्केट स्विंग्स (market swings) के जोखिम में डाल देता है, जिसे लोन देने वाली कंपनी के अधिकारों से और बढ़ावा मिलता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि LAS भले ही लागत-प्रभावी (cost-effective) हो, लेकिन मार्केट से जुड़ा रिस्क और इमरजेंसी में अचानक भुगतान की मांग का खतरा इसे पर्सनल लोन से कम अनुमानित बनाता है। अर्जेंट जरूरतों के लिए, अगर ब्याज दरें मैनेजेबल (manageable) हों, तो अनसिक्योर्ड ऑप्शन बेहतर हो सकते हैं। लोन को सुरक्षित करने वाला कोलैटरल, मार्केट के विपरीत होने पर जल्दी ही एक देनदारी (liability) बन सकता है।

सिक्योरिटीज-बैंक्ड लेंडिंग उन निवेशकों के लिए एक टूल बनी हुई है जिन्हें अपने पोर्टफोलियो को डिस्टर्ब किए बिना लिक्विडिटी (liquidity) की जरूरत है। लेकिन इसकी उपयुक्तता मार्केट की स्थिरता और उधार लेने वाले के सावधानीपूर्वक प्रबंधन पर बहुत निर्भर करती है। उधार लेने वालों को मिनिमम LTV रिक्वायरमेंट्स से काफी ज्यादा बफर बनाए रखना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो पर, खासकर हाई मार्केट वोलैटिलिटी (high market volatility) के समय, सक्रिय रूप से नजर रखनी चाहिए। फोर्स लिक्विडेशन के अंतर्निहित जोखिम के कारण, यह लोन केवल उन्हीं लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है जो कम अवधि की जरूरतों को पूरा करना चाहते हैं, जिन्हें मार्केट रिस्क के प्रति उच्च सहनशीलता (high tolerance) है, मार्जिन कॉल की मैकेनिक्स की अच्छी समझ है, और जो संभावित कैपिटल लॉस को बिना अपने लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल वेल-बीइंग (long-term financial well-being) से समझौता किए झेल सकते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.