सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) परिपक्व हो रहे हैं, मिल रहा है शानदार रिटर्न; निवेशकों को टैक्स नियमों पर सलाह

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AuthorWhalesbook News Team|Published at:
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) परिपक्व हो रहे हैं, मिल रहा है शानदार रिटर्न; निवेशकों को टैक्स नियमों पर सलाह
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) की कई श्रृंखलाएं इस अक्टूबर में परिपक्व हो रही हैं या समय से पहले रिडीम (redemption) होने के योग्य हैं, जिससे सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण 325% तक का शानदार रिटर्न मिल रहा है। लेख महत्वपूर्ण कर निहितार्थों पर जोर देता है: यदि बॉन्ड RBI के साथ परिपक्वता पर या पांच साल बाद समय से पहले रिडीम किए जाते हैं, तो पूंजीगत लाभ (capital gains) कर-मुक्त होते हैं। हालांकि, स्टॉक एक्सचेंजों पर बेचने पर पूंजीगत लाभ कर लगता है, जिसमें अल्पावधि लाभ (short-term gains) पर आय स्लैब दरों के अनुसार और दीर्घावधि लाभ (long-term gains) पर 12.5% बिना अनुक्रमण (indexation) के कर लगता है। SGBs पर मिलने वाला 2.5% वार्षिक ब्याज हमेशा कर योग्य होता है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की कई श्रृंखलाएं वर्तमान में परिपक्व हो रही हैं या समय से पहले रिडीम (early redemption) होने के लिए योग्य हो गई हैं, जिससे निवेशकों को पर्याप्त रिटर्न मिल रहा है। उदाहरण के लिए, SGB 2017-18 सीरीज़ IV, जिसे 2,987 रुपये प्रति ग्राम पर जारी किया गया था, 12,704 रुपये प्रति ग्राम पर रिडीम हुई है, जिससे आठ वर्षों में 325% का शानदार पूर्ण रिटर्न मिला है, साथ ही 2.5% वार्षिक ब्याज भी। इसी तरह, 2017 और 2020 के बीच जारी की गई अन्य श्रृंखलाएं भी सोने की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण 166% से लेकर 300% से अधिक तक का रिटर्न दे रही हैं।

SGBs कैसे काम करते हैं: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड RBI द्वारा जारी की गई सरकारी प्रतिभूतियां (government securities) हैं, जो सोने के ग्राम में अंकित होती हैं। वे जारी मूल्य पर 2.5% का निश्चित वार्षिक ब्याज प्रदान करते हैं। प्रत्येक बॉन्ड की परिपक्वता आठ वर्ष की होती है, लेकिन निवेशक विशिष्ट ब्याज भुगतान तिथियों पर पांच साल बाद समय से पहले रिडीम करने का विकल्प चुन सकते हैं। रिडेम्पशन मूल्य पिछले तीन व्यावसायिक दिनों के औसत सोने की कीमतों पर आधारित होते हैं।

टैक्सेशन स्पष्टीकरण: SGBs का कर उपचार (tax treatment) मुख्य रूप से रिडेम्पशन के तरीके पर निर्भर करता है।

  • RBI के साथ रिडेम्पशन (परिपक्वता या समय से पहले): यदि बॉन्ड को उनकी आठ साल की परिपक्वता तक रखा जाता है या पांच साल बाद RBI के साथ समय से पहले रिडीम किया जाता है, तो सोने की कीमतों में वृद्धि से होने वाला पूंजीगत लाभ (capital gains) पूरी तरह से कर-मुक्त होता है।
  • स्टॉक एक्सचेंज पर बिक्री: यदि SGB को स्टॉक एक्सचेंज पर बेचा जाता है:
    • खरीद के 12 महीनों के भीतर, लाभ को अल्पावधि पूंजीगत लाभ (short-term capital gain - STCG) माना जाता है और उस पर निवेशक की लागू आय कर स्लैब दर (income tax slab rate) के अनुसार कर लगाया जाता है।
    • 12 महीनों के बाद, लाभ को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (long-term capital gain - LTCG) माना जाता है और बजट 2024 में पेश किए गए पूंजीगत लाभ व्यवस्था (capital gains regime) के अनुसार, उस पर अनुक्रमण (indexation) के बिना 12.5% कर लगाया जाता है।
      2.5% वार्षिक ब्याज हमेशा "अन्य स्रोतों से आय" (Income from Other Sources) के रूप में कर योग्य होता है और इसे आयकर रिटर्न में (income tax returns) घोषित किया जाना चाहिए।

प्रभाव: यह समाचार SGBs रखने वाले निवेशकों के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है, क्योंकि करों के बाद शुद्ध रिटर्न को अधिकतम करने के लिए सही रिडेम्पशन रणनीति को समझना महत्वपूर्ण है। कई निवेशक इन बारीकियों से अनजान हो सकते हैं, जिससे संभावित रूप से अनुकूल परिणाम नहीं मिल सकते हैं। उचित योजना से निवेशक RBI रिडेम्पशन के माध्यम से SGBs द्वारा प्रस्तावित कर-मुक्त पूंजीगत लाभ का पूरा लाभ उठा सकते हैं।

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