31 जुलाई तक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की अंतिम तिथि नज़दीक आ रही है। ऐसे में, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) रखने वाले निवेशकों को ब्याज और कैपिटल गेन्स पर टैक्स की सही जानकारी देना ज़रूरी है। जानिए AY 2026-27 के नियम और बजट 2026 के बाद होने वाले बदलाव।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर ब्याज आय की रिपोर्टिंग
SGB पर मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी तरह टैक्सेबल होता है। इसे आपको अपने ITR फॉर्म में 'Other Sources' (Schedule OS) के तहत दिखाना होगा। हालांकि, अच्छी बात यह है कि इस ब्याज पर TDS (Tax Deducted at Source) नहीं कटता है। इसलिए, टैक्स की गणना और भुगतान की ज़िम्मेदारी आपकी खुद की होगी।
कैपिटल गेन्स और मैच्योरिटी पर टैक्स छूट
चालू एसेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए, मूल निवेशकों को SGB के मैच्योर होने पर टैक्स छूट मिलेगी। यदि आप बॉन्ड को मैच्योरिटी तक रखते हैं और RBI से सीधे रिडीम करवाते हैं, तो इस पर होने वाले कैपिटल गेन्स पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसे आप ITR फॉर्म में 'Exempt Income' (Schedule EI) के तहत रिपोर्ट कर सकते हैं। टैक्स-एफिशिएंट निवेश की तलाश करने वालों के लिए यह एक बड़ा आकर्षण रहा है।
बजट 2026 के बाद क्या बदल रहा है?
यह जानना ज़रूरी है कि बजट 2026 के बाद, एसेसमेंट ईयर 2027-28 से नियमों में बदलाव होगा। जहां मूल निवेशकों के लिए मैच्योरिटी पर टैक्स छूट जारी रहेगी, वहीं जो निवेशक सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदेंगे, उन्हें कैपिटल गेन्स पर टैक्स देना होगा। इसका मतलब है कि 2027-28 फाइलिंग साइकल से, सेकेंडरी मार्केट खरीदारों को रिडेम्पशन या बिक्री पर होने वाले कैपिटल गेन्स पर टैक्स चुकाना होगा। इन्हें 'Capital Gains' (Schedule CG) के तहत रिपोर्ट करना होगा।
सही ITR फॉर्म का चुनाव
अपनी आय के अनुसार सही ITR फॉर्म (जैसे ITR-2, ITR-3, या ITR-4) चुनना बहुत महत्वपूर्ण है। सरकारी सिक्योरिटीज से जुड़े टैक्स नियमों की सटीकता के कारण, यह ज़रूरी है कि आप अपनी ब्याज आय और कैपिटल गेन्स को सही शेड्यूल में दिखाएं। ऐसा करके आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच या नोटिस से बच सकते हैं। अपने होल्डिंग पीरियड और बॉन्ड खरीदने के तरीके (सीधे इश्यू से या सेकेंडरी मार्केट से) को समझना, भविष्य के टैक्स कैलकुलेशन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
