गर्मी की छुट्टियों में यात्रा महंगी हो रही है, लेकिन क्रेडिट कार्ड के फायदे उठाकर आप खर्चों में कटौती कर सकते हैं। ज़ीरो-फ़ॉरेक्स कार्ड, रिवॉर्ड पॉइंट और लाउंज एक्सेस जैसे फीचर्स का समझदारी से इस्तेमाल आपको बड़ी बचत दिला सकता है।
क्या है मामला?
गर्मी में यात्रा की मांग बढ़ी हुई है और फ्लाइट व होटल के दाम आम आदमी के बजट को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में, कई यात्रियों के लिए क्रेडिट कार्ड सिर्फ पेमेंट का जरिया नहीं, बल्कि यात्रा के खर्चों को मैनेज करने का ज़रिया बन गए हैं। रिवॉर्ड स्ट्रक्चर, विदेशी मुद्रा (Forex) की नीतियां और यात्रा-संबंधी खास ऑफर्स पर ध्यान देकर लोग बढ़ते दामों का असर कम करने के तरीके ढूंढ रहे हैं। लेकिन, इन सुविधाओं का असली फायदा तभी है जब आप कार्ड की शर्तों को अच्छी तरह समझ लें, क्योंकि लाउंज एक्सेस और रिवॉर्ड रिडेम्पशन जैसी चीजें अब खर्च करने के पैटर्न और बैंक की नीतियों से ज्यादा जुड़ी हुई हैं।
विदेशी मुद्रा (Forex) पर छुपी फीस का जाल
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए, विदेशी मुद्रा (Forex) पर लगने वाली मार्जिन मनी (Markup Fee) सबसे बड़ा छुपा हुआ खर्च है। ज्यादातर सामान्य क्रेडिट कार्ड हर अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन पर 1% से लेकर 3.5% तक का मार्जिन चार्ज करते हैं, साथ ही लागू GST भी। इसका मतलब है कि किसी भी विदेशी मुद्रा में किए गए खर्च पर एक बड़ी अतिरिक्त राशि जुड़ जाती है। इसलिए, यात्री अक्सर ऐसे प्रीमियम या ट्रैवल-स्पेशल कार्ड की तलाश करते हैं जो ज़ीरो-फ़ॉरेक्स मार्जिन की सुविधा देते हों। हालांकि ऐसे कार्ड की एनुअल फीस थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन बार-बार विदेश यात्रा करने वालों के लिए यह होटल बुकिंग और फ्लाइट अपग्रेड जैसे बड़े खर्चों पर लगने वाले प्रतिशत-आधारित मार्जिन को हटाकर काफी बचत करा सकते हैं।
एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के बदले नियम
मुफ्त एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस क्रेडिट कार्ड का एक अहम फायदा रहा है। लेकिन, भारतीय बैंकिंग सेक्टर में इस सुविधा के नियमों में काफी बदलाव आए हैं। कई बैंक अब अनलिमिटेड एक्सेस के बजाय, पिछली तिमाही में की गई खर्च की सीमा (Spending Threshold) के आधार पर पात्रता तय कर रहे हैं। इसका मतलब है कि आप लाउंज में तभी जा पाएंगे जब आपने कार्ड पर एक न्यूनतम राशि खर्च की हो। यात्रियों के लिए यह ज़रूरी है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपने कार्ड की पात्रता की मौजूदा शर्तें जांच लें और यह पता कर लें कि कार्ड से डोमेस्टिक या इंटरनेशनल लाउंज एक्सेस मिलेगा या नहीं, ताकि अनपेक्षित एंट्री फीस से बचा जा सके।
रिवॉर्ड पॉइंट्स को समझदारी से कमाएं और इस्तेमाल करें
ट्रैवल क्रेडिट कार्ड मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं: को-ब्रांडेड कार्ड (जैसे एयरलाइन या होटल पार्टनर वाले) और जनरल-पर्पस रिवॉर्ड कार्ड। को-ब्रांडेड कार्ड अक्सर उसी खास ब्रांड पर खर्च करने पर ज्यादा पॉइंट्स देते हैं। वहीं, प्रीमियम जनरल-पर्पस कार्ड से पॉइंट्स को अलग-अलग एयरलाइन और होटल पार्टनर के साथ ट्रांसफर किया जा सकता है। असली फायदा पॉइंट्स को भुनाने (Redemption) के तरीके में है। सिर्फ पॉइंट्स जमा करना उतना फायदेमंद नहीं है, जितना कि उन्हें पीक ट्रैवल सीजन या बिज़नेस क्लास अपग्रेड के लिए इस्तेमाल करना, जहां प्रति पॉइंट वैल्यू आमतौर पर कैश-बैक या मर्चेंडाइज की तुलना में ज्यादा होती है।
ब्याज दर का सबसे बड़ा जोखिम
किसी भी क्रेडिट कार्ड यूजर के लिए सबसे बड़ा जोखिम ब्याज दर है, जो सालाना 36% से 48% तक हो सकती है। अगर आप बैलेंस कैरी करते हैं और यह ब्याज भरते हैं, तो यात्रा पर मिलने वाले सभी रिवॉर्ड बेकार हो जाते हैं। इन कार्ड्स का इस्तेमाल करने का सबसे पहला नियम यही है कि आप हर महीने अपने पूरे बिल का भुगतान समय पर करें। अगर आपको ब्याज भरना पड़ रहा है, तो उधार लेने की यह लागत यात्रा खर्च पर मिलने वाली किसी भी छूट या पॉइंट से कहीं ज्यादा होगी।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
जो लोग कंज्यूमर फाइनेंस सेक्टर पर नज़र रख रहे हैं, उन्हें प्रीमियम सुविधाओं के लिए खर्च-आधारित बदलते नियम और ट्रैवल-ओरिएंटेड कार्ड के बढ़ते प्रतिस्पर्धी माहौल पर ध्यान देना चाहिए। कार्ड जारी करने वाली कंपनियां ग्राहक अधिग्रहण की लागत और इन सेवाओं को प्रदान करने के बढ़ते खर्चों के बीच संतुलन बनाते हुए, अपने लाउंज और रिवॉर्ड प्रोग्राम की स्थिरता पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। यूजर्स को अपने विशिष्ट कार्ड की शर्तों पर रिवॉर्ड कैप्स और लाउंज पात्रता के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इनमें समय-समय पर बदलाव हो सकता है।
