सितंबर का महीना टैक्सपेयर्स और बिजनेस के लिए काफी व्यस्त रहने वाला है। 15 सितंबर तक एडवांस टैक्स और 30 सितंबर तक टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य है, वरना भारी पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है।
सितंबर का महीना भारतीय टैक्स कैलेंडर में एक बेहद अहम पड़ाव होता है। कॉरपोरेट कंपनियों और ऑडिट के दायरे में आने वाले टैक्सपेयर्स के लिए अगले कुछ हफ्ते काफी क्रिटिकल हैं, क्योंकि इस दौरान उन्हें अपनी फाइनेंशियल जिम्मेदारियों को पूरा करना होगा। इनकम टैक्स एक्ट के तहत समय पर अनुपालन (Compliance) न करने पर न केवल जुर्माना लग सकता है, बल्कि रेगुलेटरी स्क्रूटनी का सामना भी करना पड़ सकता है।
15 सितंबर: एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त
15 सितंबर, 2026 को टैक्स ईयर 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त जमा करने की आखिरी तारीख है। कंपनियों के लिए यह एक बड़ा कैश आउटफ्लो होता है, जिसका असर उनकी लिक्विडिटी और वर्किंग कैपिटल पर पड़ सकता है। अगर कोई कंपनी अपनी अनुमानित टैक्स लायबिलिटी का कम से कम 45% इस तारीख तक जमा नहीं करती है, तो उसे इनकम टैक्स एक्ट की सेक्शन 234C के तहत ब्याज देना पड़ सकता है।
30 सितंबर: टैक्स ऑडिट रिपोर्ट का समय
इनकम टैक्स एक्ट की सेक्शन 44AB के तहत जिन टैक्सपेयर्स को अपने खातों का ऑडिट कराना अनिवार्य है, उन्हें 30 सितंबर तक अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी। इसमें फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए Form 3CA/3CB और Form 3CD फाइल करना शामिल है। यह रिपोर्ट इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को आपकी कमाई और खर्चों का सही ब्यौरा देती है और यह इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है, जिसकी डेडलाइन आमतौर पर 31 अक्टूबर होती है।
अनुपालन में कोताही और जोखिम
इन बड़ी तारीखों के अलावा, टैक्सपेयर्स को 7 सितंबर तक अगस्त महीने का TDS (Tax Deducted at Source) और TCS (Tax Collected at Source) भी जमा करना होगा। समय पर रिटर्न न भरने या ऑडिट में देरी होने से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिल सकता है, जिससे प्रशासनिक काम का बोझ बढ़ जाता है। निवेशकों के नजरिए से देखें तो जिन कंपनियों के टैक्स कंप्लायंस सिस्टम मजबूत होते हैं, वे ज्यादा भरोसेमंद मानी जाती हैं, जबकि बार-बार देरी करना कंपनी के मैनेजमेंट की कमजोरी को दर्शाता है।
