Inherited Property: विरासत में मिली प्रॉपर्टी बेचते समय कैसे कैलकुलेट करें Capital Gains Tax?

PERSONAL-FINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Inherited Property: विरासत में मिली प्रॉपर्टी बेचते समय कैसे कैलकुलेट करें Capital Gains Tax?

विरासत में मिली प्रॉपर्टी को बेचना एक टैक्सपेयरेबल घटना है। इसके लिए कैपिटल गेन्स की गणना करते समय पुरानी खरीद कीमत को आधार मानना जरूरी है, न कि विरासत में मिलने के समय की वैल्यू को।

भारत में विरासत (Inheritance) में प्रॉपर्टी मिलना एक टैक्सेबल घटना नहीं है, लेकिन जब आप इसे बेचने का फैसला करते हैं, तो उस पर कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। कानूनी उत्तराधिकारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि टैक्स देनदारी कैसे तय की जाती है, ताकि इनकम टैक्स विभाग से कोई नोटिस न आए।

कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन (Cost of Acquisition) कैसे तय करें?

ज्यादातर लोग गलती यह करते हैं कि वे विरासत में मिली प्रॉपर्टी की वैल्यू को मौजूदा मार्केट प्राइस मान लेते हैं। टैक्स के नियमों के मुताबिक, कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन वह कीमत होती है जिस पर मूल मालिक ने पहली बार प्रॉपर्टी खरीदी थी। अगर प्रॉपर्टी 1 अप्रैल, 2001 से पहले खरीदी गई थी, तो आप उस तारीख की फेयर मार्केट वैल्यू को अपना बेस बना सकते हैं। इससे लंबे समय तक रखी गई प्रॉपर्टी पर टैक्स गेन काफी कम हो जाता है।

होल्डिंग पीरियड और टैक्स की नई दरें

'टैकिंग' (Tacking) के नियम के अनुसार, प्रॉपर्टी को बेचने से पहले उसे कितने समय तक रखा गया, इसका हिसाब पिछले मालिक के समय से जोड़ा जाता है। इससे ज्यादातर मामलों में प्रॉपर्टी लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट बन जाती है, जिससे टैक्स का बोझ कम हो जाता है।

बजट 2024 के बाद, लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर अब 12.5% टैक्स लगता है, लेकिन इसमें इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता। हालांकि, 23 जुलाई, 2024 से पहले खरीदी गई प्रॉपर्टी के लिए आपके पास पुरानी 20% टैक्स दर (इंडेक्सेशन के साथ) या नई 12.5% दर, जो भी कम हो, उसे चुनने का विकल्प है।

टीडीएस (TDS) और छूट के नियम

अगर ट्रांजैक्शन की वैल्यू ₹50 लाख से ज्यादा है, तो खरीदार को 1% TDS काटना होता है। विक्रेता के तौर पर आपको यह चेक करना चाहिए कि यह Form 26AS में दिख रहा है या नहीं। टैक्स बचाने के लिए आप Section 54 के तहत नया घर खरीद सकते हैं या Section 54EC के तहत कैपिटल गेन्स बॉन्ड्स में निवेश कर सकते हैं।

उत्तराधिकारियों के लिए खास टिप्स

अगर प्रॉपर्टी के कई वारिस हैं, तो बिक्री से हुई कमाई और कैपिटल गेन्स को हर व्यक्ति के हिस्से के हिसाब से बांटा जाना चाहिए। हर वारिस को अपने हिस्से का टैक्स अलग से अपनी ITR में रिपोर्ट करना होगा। उत्तराधिकार से जुड़े सभी कानूनी दस्तावेज जैसे वसीयत या सक्सेशन सर्टिफिकेट संभाल कर रखें ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.