दान की कटौती का भ्रम
आम टैक्सपेयर्स को लगता है कि किसी भी चैरिटी (Charity) में पैसे देने पर उन्हें पूरी टैक्स छूट मिल जाएगी। लेकिन, इनकम टैक्स के नियमों के अनुसार, कई दान राशि पर आंशिक (Partial) छूट ही मिलती है। पुरानी धारणाओं पर चलकर क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा बना रहता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि दान किसे मिला है और किस तरीके से दिया गया है।
सेक्शन 80G के नियम
सेक्शन 80G के तहत दान को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला, राष्ट्रीय ज़रूरतों से जुड़े फंड जैसे 'प्राइम मिनिस्टर्स सिटीजन्स असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन्स फंड' (PM CARES Fund) में दिया गया दान। इसमें आपको पूरी राशि की कटौती मिल सकती है। दूसरा, वैज्ञानिक रिसर्च, ग्रामीण विकास या खेल जैसे कामों के लिए दी गई राशि पर एक सीमा (Limit) होती है। यह सीमा आपकी एडजस्टेड ग्रॉस टोटल इनकम (Adjusted Gross Total Income) के 10% तक ही हो सकती है। यानी, इससे ज़्यादा दान देने पर बाकी राशि पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा।
ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल रिकॉर्ड
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वेरिफिकेशन को आसान बनाने के लिए सब कुछ डिजिटल कर दिया है। अब ₹2,000 से ज़्यादा का दान कैश (Cash) में देने पर आपको 80G के तहत कोई छूट नहीं मिलेगी। यह सीधे तौर पर गैर-कटौती योग्य (Non-deductible) माना जाएगा। साथ ही, सामान या सेवा के रूप में दान देना भी टैक्स छूट के दायरे से बाहर है।
क्या है जोखिम?
अगर आप दान प्राप्त करने वाली संस्था का रजिस्ट्रेशन स्टेटस (Registration Status) चेक नहीं करते, तो आपके रिटर्न पर सवाल उठ सकते हैं। दान देते समय यह पक्का करें कि संस्था का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट वैध (Valid) हो और एक्सपायर (Expired) न हुआ हो। अगर संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया है, तो आपका क्लेम तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाएगा। इसके अलावा, फाइलिंग के समय दान लेने वाली संस्था का पैन नंबर (PAN) देना ज़रूरी है। अगर यह जानकारी गलत पाई गई, तो भी समस्या हो सकती है। इसलिए, सारे डिजिटल रिकॉर्ड्स संभाल कर रखना ज़रूरी है, वरना आपका दान एक टैक्सेबल खर्चा बन सकता है।
