इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 80E, एजुकेशन लोन पर दिए गए ब्याज पर टैक्स छूट का लाभ उठाने की सुविधा देता है। इस पर कोई ऊपरी मौद्रिक सीमा नहीं है, लेकिन यह केवल पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) चुनने वालों के लिए ही उपलब्ध है और अधिकतम आठ साल तक मान्य है। टैक्स फाइलिंग में कोई गलती न हो, इसके लिए ब्याज और मूलधन (Principal) के बीच अंतर को समझना बहुत जरूरी है।
भारत में कई परिवारों के लिए एजुकेशन लोन का बोझ एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। इस बोझ को कम करने के लिए सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80E के तहत एक खास टैक्स डिडक्शन (Tax Deduction) की सुविधा दी है। हालांकि, इस प्रावधान के बारे में पूरी जानकारी न होने पर टैक्स फाइलिंग में गलतियां हो सकती हैं।
ब्याज पर ही मिलेगी छूट, मूलधन पर नहीं
लोन लेने वालों के लिए सबसे अहम बात यह है कि यह डिडक्शन केवल लोन की ईएमआई (EMI) में लगने वाले ब्याज (Interest) पर ही मिलता है, मूलधन (Principal) पर नहीं। मान लीजिए आपकी ईएमआई ₹10,000 है और इसमें ₹3,000 ब्याज है, तो केवल इसी ₹3,000 पर आपको टैक्स छूट मिलेगी। कई लोग गलती से पूरी ईएमआई पर डिडक्शन का दावा कर देते हैं, जो कि गलत है और इससे आपका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
कोई ऊपरी सीमा नहीं, पर 8 साल की है लिमिट
दूसरे टैक्स डिडक्शन्स के विपरीत, सेक्शन 80E के तहत आप जितने चाहें उतने ब्याज का क्लेम कर सकते हैं, इसकी कोई ऊपरी मौद्रिक सीमा (Monetary Limit) तय नहीं है। यह उन छात्रों के लिए काफी फायदेमंद है जो उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए बड़ा लोन लेते हैं। यह छूट खुद के लिए, जीवनसाथी (Spouse), बच्चों या किसी ऐसे छात्र के लिए ली जा सकती है जिसके आप कानूनी अभिभावक (Legal Guardian) हैं।
पुराना टैक्स रिजीम है जरूरी
टैक्स फाइल करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि यह डिडक्शन केवल पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) चुनने वालों के लिए ही मान्य है। जो लोग नए टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में जाते हैं, उन्हें यह सुविधा नहीं मिलती। इसलिए, दोनों रिजीम के बीच फैसला करने से पहले कुल टैक्स देनदारी का हिसाब लगाना जरूरी है, क्योंकि कुछ लोगों के लिए इस छूट का न मिलना, कम टैक्स स्लैब के फायदे से ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है।
कब तक मिलेगा फायदा?
यह डिडक्शन अधिकतम आठ सालों तक ही क्लेम किया जा सकता है। यह अवधि उस असेसमेंट ईयर (Assessment Year) से शुरू होती है जब आप पहली बार ब्याज का भुगतान करते हैं, या फिर तब तक जब तक लोन का पूरा ब्याज चुका नहीं दिया जाता, जो भी पहले हो। अगर आप लोन जल्दी चुका देते हैं, तो डिडक्शन का फायदा भी उसी के साथ खत्म हो जाता है।
लोन का स्रोत भी है अहम
टैक्स छूट के लिए यह भी जरूरी है कि लोन किसी अप्रूव्ड फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट जैसे बैंक या नोटिफाइड चैरिटेबल संस्था से लिया गया हो। दोस्तों, रिश्तेदारों या कंपनी से लिए गए लोन पर यह डिडक्शन नहीं मिलेगा। टैक्स फाइल करते समय, अपने बैंक या लेंडर से एक इंटरेस्ट सर्टिफिकेट (Interest Certificate) जरूर लें, जिसमें मूलधन और ब्याज की अलग-अलग जानकारी दी गई हो।
