SIP के निवेशकों को झटका! आपकी कमाई क्यों हो रही है कम? जानें असली वजह

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
SIP के निवेशकों को झटका! आपकी कमाई क्यों हो रही है कम? जानें असली वजह

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बहुत से SIP (Systematic Investment Plan) निवेशक हाल में मिल रहे कम रिटर्न से निराश हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह असल में उम्मीदों और हकीकत का अंतर है, न कि किसी प्रोडक्ट की खराबी। जब बाज़ार में असाधारण बढ़ोतरी होती है, तो यह भविष्य के लिए अवास्तविक उम्मीदें पैदा कर देता है। लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक ग्रोथ और इक्विटी रिटर्न के बीच के कनेक्शन को समझना, निवेशकों को इस 'साइडवेज़' यानी एक दायरे में चलने वाले बाज़ार के दौर में पैनिक-सेलिंग से बचने में मदद कर सकता है।

क्या हुआ है?

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) एक ऐसे दौर से गुज़र रहे हैं जहाँ निवेशकों को मिल रहे रिटर्न में कमी आई है या वे पिछले हाई-ग्रोथ पीरियड की तुलना में स्थिर हो गए हैं। इस वजह से इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या SIP रिटेल निवेशकों के लिए एक असरदार तरीका है। असल समस्या यह नहीं है कि यह निवेश का तरीका खराब है, बल्कि यह है कि कई निवेशकों की उम्मीदें इस हकीकत से मेल नहीं खातीं कि इक्विटी मार्केट लॉन्ग-टर्म में कैसे काम करते हैं।

रिटर्न की हकीकत

यह समझने के लिए कि रिटर्न कम क्यों लग रहे हैं, हमें ऐतिहासिक आंकड़ों को देखना होगा। पिछले कुछ दशकों में, भारत के इक्विटी मार्केट का प्रदर्शन मोटे तौर पर देश की नॉमिनल इकोनॉमिक ग्रोथ के हिसाब से रहा है। यह रियल GDP ग्रोथ और महंगाई को जोड़कर निकाला जाता है। ऐतिहासिक रूप से, इससे सालाना लगभग 10% से 12% की नॉमिनल ग्रोथ रेट मिलती है।

जब बाज़ार उचित वैल्यू पर होता है, तो लॉन्ग-टर्म रिटर्न के लिए यह रेंज एक वाजिब उम्मीद है। अगर कोई निवेशक उम्मीद करता है कि उसका पैसा हर 6 साल में दोगुना हो जाएगा, तो यह 12% सालाना रिटर्न के बराबर है। दिक्कत तब आती है जब बाज़ार ओवरवैल्यूड हो जाते हैं और शॉर्ट-टर्म में 20% से 25% तक का रिटर्न देते हैं। ऐसे समय में निवेश करने वाले निवेशक गलती से इन हाई रिटर्न्स को ही सामान्य मानने लगते हैं। जब बाज़ार आखिरकार साइडवेज़ हो जाता है या रियल इकोनॉमिक ग्रोथ के हिसाब से एडजस्ट करता है, तो परफॉर्मेंस निराशाजनक लगती है, भले ही यह असल में ऐतिहासिक औसत पर लौट रहा हो।

बाज़ार एक दायरे में क्यों चलते हैं?

बाज़ार सीधी रेखा में नहीं चलते। वे अक्सर एक 'साइडवेज़' फेज से गुज़रते हैं - एक ऐसा समय जहाँ कीमतें लगातार बढ़ने के बजाय एक सीमित दायरे में घूमती रहती हैं। यह अक्सर बाज़ार का ओवरवैल्यूएशन को 'डाइजेस्ट' करने का तरीका होता है। अगर शेयर की कीमतें कंपनी की कमाई से तेज़ी से बढ़ी हैं, तो बाज़ार को कमाई को उस स्तर तक आने के लिए समय चाहिए होता है।

इस दौरान, SIP निवेशकों को लग सकता है कि उनके मंथली इन्वेस्टमेंट में ज़्यादा बढ़ोतरी नहीं हो रही है। हालाँकि, यह फेज अक्सर इकोनॉमिक साइकिल का एक सामान्य हिस्सा होता है। जो निवेशक SIP को तुरंत अमीर बनने का ज़रिया मानते हैं, उन्हें ऐसे समय में बाहर निकलने का दबाव महसूस होता है। इसमें सबसे बड़ा रिस्क यह है कि बाज़ार के कंसॉलिडेशन के दौरान बाहर निकलने से अक्सर तब के मौके छूट जाते हैं जब बाज़ार अपनी अगली ग्रोथ फेज शुरू करता है।

बदलती ग्लोबल डायनामिक्स

आगे देखते हुए, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य की ग्रोथ इक्वेशन बदल सकती है। जैसे-जैसे दुनिया डी-ग्लोबलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी चीज़ों का सामना कर रही है, कुछ एनालिस्ट्स एक ज़्यादा कंज़र्वेटिव आउटलुक का अनुमान लगा रहे हैं, जिससे लॉन्ग-टर्म उम्मीदें 10-12% से घटकर 9-10% तक आ सकती हैं। हालाँकि ये सिर्फ अनुमान हैं, लेकिन ये इस बात पर ज़ोर देते हैं कि निवेशकों के लिए अपने फाइनेंशियल गोल्स को लेकर रियलिस्टिक रहना क्यों ज़रूरी है। 20% रिटर्न की उम्मीद पर बनी कोई भी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऐसे दौर में मुश्किल में पड़ जाएगी जहाँ अंडरलाइंग इकोनॉमी ज़्यादा मॉडरेट पेस से बढ़ रही हो।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

SIP में निवेश करने वालों के लिए, सबसे ज़रूरी फैक्टर रोज़ या महीने के उतार-चढ़ाव पर नज़र रखना नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म ट्रेंड पर ध्यान देना है। वेल्थ क्रिएशन के लिए सबसे बड़ा खतरा अक्सर खुद बाज़ार नहीं, बल्कि मार्केट मूवमेंट्स पर निवेशक की प्रतिक्रिया होती है। एक फ्लैट या नेगेटिव पीरियड के दौरान घबराकर SIP बंद करने से निवेशक को बाज़ार के रिकवर होने पर फायदा उठाने से रोका जा सकता है। शॉर्ट-टर्म निराशा पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, निवेशकों को अपने लॉन्ग-टर्म गोल्स पर ध्यान देना चाहिए, लगातार मंथली इन्वेस्टमेंट जारी रखना चाहिए, और इस बात का रियलिस्टिक नज़रिया रखना चाहिए कि इक्विटी मार्केट एक पूरे इकोनॉमिक साइकिल में क्या दे सकते हैं।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.