निवेशकों को मिला ₹15,254 का शानदार रिडेम्पशन रेट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने SGB 2020-21 सीरीज VII के लिए ₹15,254 प्रति यूनिट का रिडेम्पशन प्राइस तय किया है। यह कीमत रिडेम्पशन से ठीक पहले के तीन कारोबारी दिनों के 999 शुद्धता वाले सोने की इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा प्रकाशित कीमतों का औसत है। जिन निवेशकों ने इन बॉन्ड्स को इश्यू प्राइस ₹5,051 (या ऑनलाइन सब्सक्राइब करने वालों के लिए ₹5,001) पर खरीदा था, उनके लिए यह 200% से ज्यादा का कैपिटल एप्रिसिएशन (पूंजी वृद्धि) है। इस बंपर रिटर्न में 2.5% का सालाना ब्याज, जिसका भुगतान छमाही (semi-annually) किया गया था, उसने भी बड़ा योगदान दिया है। मौजूदा समय में 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹15,500 प्रति ग्राम है, जो सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी को दर्शाता है।
गोल्ड निवेश का बदलता परिदृश्य
SGBs ने निवेशकों को सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव, गारंटीड ब्याज और टैक्स छूट का लाभ दिया था। ये फिजिकल गोल्ड के मुकाबले एक सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प थे, जिनमें स्टोरेज और शुद्धता की चिंता नहीं थी, और इन्हें सॉवरेन गारंटी भी मिली हुई थी। वहीं, गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) भी डिजिटल गोल्ड एक्सपोजर देते हैं, लेकिन उनमें SGB जैसा ब्याज नहीं मिलता। फिजिकल गोल्ड आज भी लोकप्रिय है, लेकिन इसमें मेकिंग चार्ज और स्टोरेज का खर्च आता है।
विश्लेषकों का मानना है कि सेंट्रल बैंक की लगातार खरीद, संभावित ब्याज दरों में बदलाव और भू-राजनीतिक कारणों से 2026 और 2027 तक सोने की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। फरवरी 2025 में RBI ने नए SGB इश्यू करना बंद करने की घोषणा की थी, जिससे 2015 में फिजिकल गोल्ड आयात घटाने और बचत को वित्तीय साधनों में लाने के लिए शुरू की गई यह योजना अब अंतिम दौर में है।
टैक्स का नया नियम देगा झटका
निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि बजट 2026 के बाद से टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव आया है। 1 अप्रैल 2026 के बाद रिडीम या बेचे गए SGBs पर होने वाले कैपिटल गेन्स पर अब टैक्स लगेगा, बशर्ते बॉन्ड को 8 साल की मैच्योरिटी तक होल्ड न किया गया हो। इसका मतलब है कि जो निवेशक प्रीमेच्योर रिडेम्पशन कर रहे हैं, जैसे कि 2020-21 सीरीज VII के होल्डर्स, उन्हें अपने मुनाफे पर कैपिटल गेन्स टैक्स चुकाना होगा, जिससे नेट रिटर्न कम हो जाएगा। सेकेंडरी मार्केट में खरीदे गए बॉन्ड्स पर होल्डिंग अवधि चाहे जितनी भी हो, टैक्स लगेगा।
नए SGBs जारी न होने से अब निवेशकों के पास सरकार द्वारा समर्थित, ब्याज देने वाले डिजिटल गोल्ड इंस्ट्रूमेंट का विकल्प नहीं बचा है। ऐसे में निवेशक अब गोल्ड ETFs को उनकी तरलता (liquidity) और सामान्य टैक्स नियमों के कारण अधिक पसंद कर सकते हैं। यह बदलाव सरकार की ओर से बचत को अन्य वित्तीय संपत्तियों की ओर मोड़ने का एक प्रयास माना जा रहा है, जो शायद SGB योजना की ऊंची उधार लागत से भी प्रभावित है।
