SEBI का नया दांव: अब आएगी 'म्यूचुअल फंड-ओनली' PMS सर्विस, निवेशकों के लिए क्या है खास?

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AuthorMehul Desai|Published at:
SEBI का नया दांव: अब आएगी 'म्यूचुअल फंड-ओनली' PMS सर्विस, निवेशकों के लिए क्या है खास?

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) अब 'म्यूचुअल फंड-ओनली' पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के लिए एक नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लाने की तैयारी में है। इस नई कैटेगरी में केवल डायरेक्ट म्यूचुअल फंड, ETF और इंडेक्स फंड्स में ही निवेश किया जाएगा, जिसका मकसद छोटे निवेशकों के लिए निवेश के रास्ते आसान बनाना है।

'म्यूचुअल फंड-ओनली' PMS: क्या है SEBI का प्लान?

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के तहत एक नई कैटेगरी बनाने का प्रस्ताव रखा है, जो पूरी तरह से म्यूचुअल फंड पर केंद्रित होगी। अभी बाजार में कई तरह की पोर्टफोलियो मैनेजमेंट स्कीमें मौजूद हैं, लेकिन SEBI का यह कदम खास उन पोर्टफोलियो के लिए एक स्पष्ट और स्टैंडर्ड रेगुलेटरी ढांचा तैयार करेगा जो सिर्फ डायरेक्ट म्यूचुअल फंड, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) और इसी तरह के दूसरे इंस्ट्रूमेंट्स में पैसा लगाते हैं।

छोटे निवेशकों को मिलेगा सीधा फायदा

इस नई कैटेगरी को मंजूरी मिलने से, रेगुलेटर उन निवेशकों के लिए पेशेवर मैनेजमेंट के दरवाजे खोलना चाहता है जो म्यूचुअल फंड में अपना निवेश मैनेज करवाना चाहते हैं। यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन होगा जो पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की सुविधा तो चाहते हैं, लेकिन सीधे शेयर खरीदने की जटिलताओं या ज्यादा खर्चों से बचना चाहते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, निवेशकों को अब ऐसे प्रोफेशनल स्ट्रेटेजीज तक आसान पहुंच मिलेगी जो अलग-अलग म्यूचुअल फंड्स के मिश्रण में पैसा लगाते हैं, न कि सीधे किसी कंपनी के शेयरों में।

बॉन्ड SIP और मोमेंटम फंड्स पर भी खास ध्यान

PMS फ्रेमवर्क के अलावा, बाजार में 'बॉन्ड SIP' जैसे ऑटोमेटेड निवेश प्रोडक्ट्स भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ये स्कीमें निवेशकों को सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए धीरे-धीरे बॉन्ड जमा करने का मौका देती हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड SIP के विपरीत, जो तुरंत डाइवर्सिफिकेशन देते हैं, बॉन्ड SIP धीरे-धीरे पोर्टफोलियो बनाते हैं। इसका मतलब है कि अगर सीरीज के शुरुआती बॉन्ड्स में से कोई डिफॉल्ट करता है, तो शुरुआत में पोर्टफोलियो पर इसका असर काफी ज्यादा हो सकता है। इसलिए, निवेशकों को सिर्फ SIP की सुविधा पर ध्यान न देकर, बॉन्ड्स की क्रेडिट क्वालिटी पर गौर करना चाहिए।

इसी के साथ, एक्टिव मोमेंटम फंड्स भी भारतीय बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं। ये फंड्स उन स्टॉक्स को खरीदते हैं जो हाल में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और उन स्टॉक्स को बेच देते हैं जिनमें तेजी कमजोर पड़ने लगती है। यह स्ट्रेटेजी कुछ फंड्स को मुश्किल मार्केट साइकल्स से निकालने में मददगार रही है, लेकिन इसमें फंड मैनेजर्स को लगातार रीबैलेंसिंग और तेजी से फैसले लेने की जरूरत पड़ती है। निवेशकों को इन फंड्स के लंबे समय के परफॉर्मेंस और अलग-अलग इकोनॉमिक साइकल्स में उनके प्रदर्शन पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि मार्केट ट्रेंड्स के बदलने पर इनकी इफेक्टिवनेस भी बदल सकती है। अगला अहम कदम SEBI की फाइनल नोटिफिकेशन का इंतजार करना और किसी भी नए मोमेंटम-बेस्ड या बॉन्ड-लिंक्ड प्रोडक्ट में पैसा लगाने से पहले उसके रिस्क डिस्क्लोजर डॉक्यूमेंट्स को ध्यान से पढ़ना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.