'Finfluencers' पर SEBI का शिकंजा
SEBI के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय रिटेल निवेशक निवेश संबंधी सलाह के लिए 'Finfluencers' पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। लगभग 62% रिटेल निवेशक इन इन्फ्लुएंसर्स की सलाह मानते हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 2% ही SEBI के पास रजिस्टर्ड हैं। इसका मतलब है कि ज्यादातर सलाहकार अयोग्य हैं।
ये अनरजिस्टर्ड इन्फ्लुएंसर्स अक्सर सिर्फ अपनी जीत वाली ट्रेड्स (winning trades) दिखाते हैं, और अपने नुकसान (losses) छुपाते हैं, जिससे निवेशकों में सफलता की झूठी उम्मीद पैदा होती है। निवेशकों को खास प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए उकसाया जा सकता है या 'पंप-एंड-डंप' (pump-and-dump) स्कीमों का शिकार बनाया जा सकता है, जहां शेयर की कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर बेच दिया जाता है। यह सब 'FOMO' (Fear Of Missing Out) जैसे साइकोलॉजिकल ट्रिगर का फायदा उठाकर किया जाता है।
AI की सीमाएं और SEBI का एक्शन
दूसरी ओर, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित निवेश टूल्स तेज़ स्पीड और भावना-रहित होने का दावा करते हैं, लेकिन पर्सनल फाइनेंस के लिए इनकी उपयोगिता सीमित है। ये प्लेटफॉर्म अक्सर पिछले डेटा के आधार पर स्ट्रेटेजी बनाते हैं, जो हमेशा भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं देता। महत्वपूर्ण बात यह है कि ये किसी व्यक्ति की बदलती वित्तीय स्थिति, जोखिम उठाने की क्षमता या दीर्घकालिक लक्ष्यों को समझने में चूक कर सकते हैं।
इन जोखिमों को कम करने के लिए, SEBI ने डिजिटल फाइनेंशियल स्पेस पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है। SEBI ने स्टॉक मार्केट एजुकेटर्स के लिए रियल-टाइम डेटा का इस्तेमाल सीमित कर दिया है, उन्हें केवल तीन महीने पुरानी स्टॉक प्राइस जानकारी का उपयोग करने की अनुमति है। यह उन्हें शिक्षा के नाम पर रियल-टाइम ट्रेडिंग टिप्स देने से रोकता है।
रेगुलेटर 'सुदर्शन' (Sudarshan) नाम के एक AI टूल का भी उपयोग कर रहा है ताकि ऑनलाइन उल्लंघनों की निगरानी की जा सके। SEBI ने यह भी अनिवार्य किया है कि रजिस्टर्ड सलाहकार AI टूल्स द्वारा की गई किसी भी गलती के लिए पूरी जिम्मेदारी लेंगे। विज्ञापनों की समीक्षा भी कड़ी कर दी गई है, और रजिस्टर्ड फर्मों को अनरजिस्टर्ड इन्फ्लुएंसर्स के साथ जोड़ने को अब एक उल्लंघन माना जा रहा है।
आगे की राह
अयोग्य finfluencers और सामान्य AI टूल्स पर निर्भर रहने से निवेशकों को बड़े वित्तीय और भावनात्मक नुकसान हो सकते हैं। यह एक अनुचित प्रतिस्पर्धा (unfair playing field) भी बनाता है, क्योंकि अनरजिस्टर्ड प्लेयर्स की लागत कम होती है। भविष्य में, वित्तीय सलाह एक हाइब्रिड मॉडल, यानी AI टूल्स और मानव मार्गदर्शन का मिश्रण हो सकती है। SEBI का सक्रिय रवैया निवेशक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन सफलता मजबूत प्रवर्तन (enforcement) और व्यापक जन जागरूकता पर निर्भर करेगी। सलाह चाहने वाले लोगों को जवाबदेही और उनकी वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप योजनाओं के लिए हमेशा SEBI-रजिस्टर्ड पेशेवरों को चुनना चाहिए।
