वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत योजना (SCSS) पर फिलहाल **8.2%** सालाना ब्याज मिल रहा है, जो पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) के **7.4%** से बेहतर है। ₹5 लाख के निवेश पर SCSS, POMIS की तुलना में सालाना लगभग **₹4,000** ज्यादा ब्याज देती है। निवेशकों को अपनी आय की जरूरत के हिसाब से SCSS की ऊंची कमाई या POMIS की मासिक भुगतान की सुविधा में से चुनना होगा।
SCSS और पोस्ट ऑफिस MIS: वरिष्ठ नागरिकों के लिए कमाई का कौन सा जरिया बेहतर?
भारत में ऐसे वरिष्ठ नागरिक जो कम जोखिम वाले और सरकारी गारंटी वाली निवेश योजनाओं की तलाश में हैं, वे अक्सर सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) और पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) के बीच कंफ्यूज रहते हैं। जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के अनुसार, SCSS पर 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है, जबकि POMIS पर 7.4% सालाना ब्याज दिया जा रहा है।
सालाना कमाई पर क्या है असर?
ब्याज दरों में यह अंतर निवेशकों की कुल कमाई पर सीधा असर डालता है। अगर ₹5 लाख की एकमुश्त रकम दोनों में से किसी एक स्कीम में डाली जाए, तो 0.8% के अंतर के कारण रिटर्न में बड़ा फर्क दिखेगा। SCSS में निवेश करने पर सालाना लगभग ₹40,996 की कमाई होगी। वहीं, POMIS में इतनी ही रकम पर सालाना लगभग ₹36,996 का रिटर्न मिलेगा। इसका मतलब है कि SCSS चुनने वाले निवेशकों को सालाना ₹4,000 की अतिरिक्त आय होगी।
भुगतान की फ्रीक्वेंसी और निवेश की अवधि
ब्याज दर के अलावा, निवेशकों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि ब्याज का भुगतान कैसे होता है। SCSS में ब्याज का भुगतान हर तीन महीने (तिमाही) में किया जाता है, जो उन लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकता है जिन्हें खर्चों के लिए नियमित नकदी की जरूरत होती है। POMIS में यह सुविधा थोड़ी अलग है, यह हर महीने ब्याज का भुगतान करती है। यह सुविधा उन रिटायर लोगों के लिए बेहतर मानी जाती है जो अपने रोज़मर्रा के खर्चों के लिए नियमित मासिक आय पर निर्भर करते हैं।
दोनों ही स्कीमों की अवधि 5 साल है। चूँकि ये दरें सरकार द्वारा तय की जाती हैं और हर तिमाही में बदली जा सकती हैं, इसलिए निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इन स्कीमों पर मिलने वाला रिटर्न पूरे 5 साल के लिए फिक्स नहीं होता। अगर अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें बदलती हैं, तो सरकार नई जमाओं के लिए या कुछ मामलों में मौजूदा जमाओं के लिए भी दरों को एडजस्ट कर सकती है।
किन बातों का रखें ध्यान?
SCSS ज्यादा रिटर्न तो देती है, लेकिन यह सिर्फ 60 साल या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए है। वहीं, 55 साल से ऊपर के वे लोग जो किसी विशेष शर्त के तहत रिटायर हुए हैं, वे भी इसमें निवेश कर सकते हैं। POMIS के लिए पात्रता नियम थोड़े आसान हैं। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दोनों स्कीमों से होने वाली कमाई पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा। निवेश करने से पहले, SCSS की अधिकतम निवेश सीमा की जांच करना न भूलें, क्योंकि इसकी एक कैप है, जो POMIS की तुलना में इसमें आवंटित की जा सकने वाली पूंजी की मात्रा को प्रभावित कर सकती है।
