फिक्स्ड इनकम (Fixed Income) की सुरक्षा का भ्रम
जब करेंसी (Currency) कमजोर होती है, तो घरेलू पूंजी के लिए सबसे बड़ा खतरा उसकी क्रय शक्ति (Purchasing power) का कम होना है। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भले ही मानसिक सुकून देते हों, लेकिन ये अक्सर महंगाई (Inflation) और टैक्स (Tax) को मिलाकर भी रिटर्न (Return) नहीं दे पाते। जब रुपया डॉलर के मुकाबले गिरता है, तो आयातित कमोडिटी (Commodity) और एनर्जी (Energy) की लागत बढ़ जाती है, जिससे महंगाई और बढ़ जाती है। जो निवेशक 7% के नॉमिनल यील्ड (Nominal yield) पर भरोसा करते हैं, वे पाते हैं कि महंगाई और टैक्स के बाद उनके पैसे की असल कीमत घट रही है। ऐसे में, फिक्स्ड डिपॉजिट की 'सुरक्षा' एक भ्रम साबित हो रही है।
कमोडिटी (Commodity) की संवेदनशीलता और ग्लोबल कनेक्शन
सोना (Gold) कई लोगों के लिए एक भरोसेमंद हेज (Hedge) है, लेकिन इसकी असरदारिता डॉलर और सोने की कीमतों के उलटे रिश्ते पर निर्भर करती है। गिरते रुपये से सोने की घरेलू कीमत को एक सपोर्ट मिलता है, लेकिन यह अक्सर ग्लोबल (Global) डॉलर-आधारित स्पॉट प्राइस (Spot price) में उतार-चढ़ाव से बेअसर हो जाता है। जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ब्याज दरें ऊंची रखता है, तो बिना यील्ड वाले सोने को रखने की अवसर लागत (Opportunity cost) बढ़ जाती है। इससे घरेलू करेंसी में कमजोरी के बावजूद सोने की अपील कम हो जाती है। अब समझदार निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) को तरजीह दे रहे हैं, जो कैपिटल एप्रिसिएशन (Capital appreciation) और ब्याज आय के बीच संतुलन बनाते हैं।
REITs बनाम फिजिकल प्रॉपर्टी (Physical Property)
रियल एस्टेट (Real Estate) को एक सुरक्षित हेज मानने वाली सोच में बदलाव आ रहा है। हालांकि ऐतिहासिक रूप से जमीन धन का भंडार रही है, लेकिन सीधे स्वामित्व में शुरुआत के लिए बड़ा अमाउंट (Amount) चाहिए होता है और इसमें लिक्विडिटी (Liquidity) की भारी कमी होती है। मौजूदा मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary policy) बताती है कि रुपये में लगातार कमजोरी केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने या स्थिर रखने पर मजबूर कर सकती है, जिससे डेवलपर्स (Developers) और खरीदारों के लिए लोन की लागत बढ़ जाएगी। ऐसे में, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) एक बेहतर जरिया बनकर उभरे हैं। ये प्रोफेशनल मैनेजमेंट (Professional management) और डिविडेंड (Dividend) के जरिए कमाई का मौका देते हैं, बिना किसी एक प्रॉपर्टी में निवेश के बड़े जोखिम के।
स्ट्रक्चरल कमजोरियां (Structural Vulnerabilities)
जो निवेशक पूरी तरह से घरेलू एसेट्स (Domestic assets) पर निर्भर हैं, वे 'होम बायस' (Home bias) के जाल में फंस सकते हैं। यह मान लेना कि भारतीय रियल एस्टेट या घरेलू फिक्स्ड इनकम हमेशा सुरक्षा कवच का काम करेगा, यह करेंसी डेप्रिसिएशन (Currency depreciation) और महंगाई के बीच के संबंध को नजरअंदाज करना है। इसके अलावा, रियल एस्टेट के लिए हाई-ग्रोथ के अनुमान, क्रेडिट टाइट (Credit tight) होने पर डेवलपर्स के लिए प्रोजेक्ट में देरी और लिक्विडिटी की कमी के जोखिमों को ध्यान में नहीं रखते। जो लोग सीधे प्रॉपर्टी में ज्यादा निवेश कर चुके हैं, वे 'लॉक-इन' (Lock-in) रिस्क का सामना कर रहे हैं; अगर मैक्रो माहौल तेजी से बदलता है, तो जल्दी से पैसा निकालने में असमर्थता बड़ा नुकसान करा सकती है। एक सही डिफेंसिव स्ट्रैटेजी (Defensive strategy) के लिए घरेलू सीमाओं से परे जाकर ग्लोबली डाइवर्सिफाइड (Globally diversified) इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना होगा, जो रुपये में उतार-चढ़ाव से जुड़े लोकल रिस्क (Local risk) को कम कर सकें।
