FAST-DS Disclosure: रुपये की कमजोरी बढ़ाई मुश्किल, विदेशी संपत्ति वालों के लिए Compliance का संकट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
FAST-DS Disclosure: रुपये की कमजोरी बढ़ाई मुश्किल, विदेशी संपत्ति वालों के लिए Compliance का संकट

Foreign Assets of Small Taxpayers Disclosure Scheme (FAST-DS) में अब नियमों का पेच फंस गया है। रुपये की गिरावट के कारण कई लोगों की विदेशी संपत्ति **₹1 करोड़** की लिमिट को पार कर रही है, जिससे उन्हें 'Black Money Act' के तहत भारी जुर्माने का डर सता रहा है।

भारत सरकार ने 16 अगस्त, 2026 को Foreign Assets of Small Taxpayers Disclosure Scheme (FAST-DS) लॉन्च की थी, ताकि लोग अपनी अनडिस्क्लोज्ड विदेशी संपत्तियों को रेगुलराइज कर सकें। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी ने टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है।

क्या है स्कीम का पेंच?

इस स्कीम के तहत 31 दिसंबर, 2026 तक 60% टैक्स और पेनल्टी देकर संपत्ति घोषित की जा सकती है, बशर्ते कुल वैल्यू ₹1 करोड़ से कम हो। समस्या यह है कि नियमों के मुताबिक, विदेशी संपत्तियों को 31 मार्च, 2026 की एक्सचेंज रेट से रुपये में बदलना अनिवार्य है। पिछले कुछ वर्षों में रुपया 14% से 33% तक कमजोर हुआ है, जिससे कई लोगों की संपत्ति जो पहले ₹1 करोड़ से नीचे थी, अब कैलकुलेशन में इस लिमिट को पार कर रही है।

'ब्लैक मनी एक्ट' का खतरा

अगर किसी की संपत्ति ₹1 करोड़ से ज्यादा पाई जाती है, तो उसे स्कीम के फायदों से बाहर रखा जा सकता है। इसके बाद उस व्यक्ति पर 'Black Money (Undisclosed Foreign Income and Assets) and Imposition of Tax Act, 2015' की सख्त धाराएं लग सकती हैं, जिसमें भारी पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

विशेषज्ञों की राय

पूर्व ICAI प्रेसिडेंट वेद जैन समेत कई टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि 'Black Money Act' के तहत 31 मार्च, 2026 की रेट का इस्तेमाल करना अनिवार्य है, जिसमें कोई ढील मिलने की उम्मीद कम है। कुछ लोग Income-Tax Rules के 'Rule 115' का हवाला देकर ऐतिहासिक दरों (Historical rates) पर कैलकुलेशन की सलाह दे रहे हैं, लेकिन टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा इसे स्वीकार न किए जाने का जोखिम बना हुआ है।

टैक्स एडवाइजर्स ने चेतावनी दी है कि गलत वैल्यूएशन या गलत जानकारी देने पर पूरा डिस्क्लोजर रद्द माना जाएगा। फिलहाल, निवेशकों को सरकारी सर्कुलर का इंतजार है, क्योंकि यह स्कीम के दायरे में आने वाले टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा रिस्क है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.