Rule of 70: रिटायरमेंट प्लानिंग में ये फॉर्मूला नहीं जानते, तो बढ़ सकती है बड़ी मुसीबत

PERSONAL-FINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Rule of 70: रिटायरमेंट प्लानिंग में ये फॉर्मूला नहीं जानते, तो बढ़ सकती है बड़ी मुसीबत

महंगाई के चलते आपके खर्च कितनी जल्दी दोगुने हो सकते हैं, इसे समझने का एक आसान तरीका है 'Rule of 70'। भारतीय निवेशक अक्सर लो-यील्ड सेविंग पर भरोसा करके बड़ी गलती कर बैठते हैं।

बहुत से लोग रिटायरमेंट प्लानिंग के दौरान यह गलती करते हैं कि वे भविष्य के खर्चों को आज के समय के अनुसार ही मान लेते हैं। 'Rule of 70' आपको यह समझने में मदद करता है कि समय के साथ महंगाई कैसे आपकी क्रय शक्ति (purchasing power) को कम करती है। इसका फॉर्मूला बेहद आसान है: 70 को सालाना महंगाई दर (inflation rate) से भाग (divide) कर दें। जो परिणाम आएगा, वह यह बताएगा कि आपके खर्च कितने सालों में दोगुने हो जाएंगे।

भारत में महंगाई का गणित

भारत में लॉन्ग-टर्म महंगाई दर अक्सर 5% से 6% के बीच रहती है। अगर हम 6% महंगाई दर को मानें, तो आपके रहने का खर्च लगभग 11 से 12 सालों में दोगुना हो जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि अगर आज आपका मासिक खर्च ₹50,000 है, तो एक दशक बाद यह बढ़कर ₹1 लाख और 24 सालों में लगभग ₹2 लाख हो जाएगा। 30 साल के किसी व्यक्ति के लिए, जो 60 की उम्र में रिटायर होना चाहता है, यह कंपाउंडिंग असर सबसे बड़ा जोखिम है।

'सेफ' निवेश का जाल

अक्सर भारतीय निवेशक सिर्फ 'सुरक्षित' माने जाने वाले फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या सेविंग अकाउंट पर निर्भर रहते हैं। हालांकि ये निवेश कैपिटल प्रोटेक्शन देते हैं, लेकिन टैक्स और महंगाई घटाने के बाद इनका रिटर्न बहुत कम हो जाता है। अगर आपको बैंक से 6% रिटर्न मिल रहा है और उस पर टैक्स भी देना पड़ रहा है, तो आपका 'रियल रिटर्न' महंगाई दर से नीचे गिर जाता है। इसका मतलब है कि आपकी बचत की असल वैल्यू हर साल घट रही है।

पोर्टफोलियो में बदलाव है जरूरी

महंगाई को मात देने के लिए आपको अपने पोर्टफोलियो में ऐसे एसेट्स शामिल करने होंगे जो लंबे समय में बेहतर ग्रोथ दें। केवल डेट (Debt) आधारित निवेश से रिटायरमेंट के बड़े लक्ष्य पूरे करना मुश्किल है। आपको इक्विटी (Equity) या डायवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) जैसे ग्रोथ-ओरिएंटेड विकल्पों पर ध्यान देना होगा।

याद रखें, रिटायरमेंट प्लानिंग केवल एक बार का काम नहीं है। जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, निवेश को भी बढ़ाते रहें। हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में महंगाई दर आम महंगाई से कहीं ज्यादा होती है, इसलिए साल में एक बार अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू जरूर करें कि क्या आपका रिटायरमेंट कॉर्पस बढ़ती महंगाई के साथ तालमेल बिठा पा रहा है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.