Term Insurance: क्या **₹1 करोड़** का कवर वाकई काफी है? कहीं आप बड़ी भूल तो नहीं कर रहे?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Term Insurance: क्या **₹1 करोड़** का कवर वाकई काफी है? कहीं आप बड़ी भूल तो नहीं कर रहे?

बाजार में **₹1 करोड़** का टर्म कवर एक स्टैंडर्ड बेंचमार्क बन गया है, लेकिन क्या यह आपकी असल जरूरतों के लिए पर्याप्त है? अक्सर लोग महंगाई और कर्ज के बोझ को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे परिवार आर्थिक संकट में पड़ सकता है।

भारत में टर्म लाइफ इंश्योरेंस के लिए ₹1 करोड़ का आंकड़ा एक लोकप्रिय बेंचमार्क बन चुका है। इसकी मुख्य वजह इसे खरीदने में आसानी और एक बड़ी 'राउंड फिगर' का मनोवैज्ञानिक सुकून है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसे 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' (सबके लिए एक जैसा) समझना एक बड़ी गलती हो सकती है। अगर इंश्योरेंस का चुनाव मार्केटिंग ट्रेंड्स को देखकर किया जाए, तो यह भविष्य की जरूरतों और वर्तमान सच्चाई के बीच के अंतर को नहीं भर पाता।

महंगाई का असर

टर्म इंश्योरेंस लेते समय सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाने वाला फैक्टर है 'महंगाई'। आज जो ₹1 करोड़ की रकम आपको बड़ी लग रही है, 10 साल बाद उसकी वैल्यू काफी कम हो जाएगी। अगर पॉलिसी का उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई या घर के लंबे समय के खर्चों को संभालना है, तो महंगाई इन लागतों को कई गुना बढ़ा देगी। यदि इंश्योरेंस कवर स्थिर है, तो भविष्य में यह राशि जरूरत का एक छोटा हिस्सा ही पूरा कर पाएगी।

देनदारियों (Liabilities) का गणित

इंश्योरेंस का मुख्य काम आय की कमी को पूरा करना और वित्तीय जिम्मेदारियों को निपटाना है। यदि आप पर होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन है, तो आपके जाने के बाद भी ये देनदारियां खत्म नहीं होंगी। एक बेहतर इंश्योरेंस प्लान में इन सभी कर्जों को शामिल करना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपके पास ₹50 लाख का होम लोन है और आपने ₹1 करोड़ की पॉलिसी ली है, तो सिर्फ ₹50 लाख ही आपके परिवार के लिए बचेंगे, जो शायद उनके जीवनयापन के लिए काफी न हों।

एम्प्लॉयर कवर का जाल

कई लोग अपनी कंपनी द्वारा दिए गए ग्रुप टर्म इंश्योरेंस पर निर्भर रहते हैं। हालांकि ये सुविधाजनक होते हैं, लेकिन इनमें सबसे बड़ा रिस्क 'पोर्टेबिलिटी' का है। यह कवर आपकी नौकरी से जुड़ा होता है, यानी जॉब बदलते ही सुरक्षा खत्म। साथ ही, इसका अमाउंट कंपनी तय करती है, आपकी निजी जरूरतों के हिसाब से नहीं। एक पर्सनल टर्म पॉलिसी आपके करियर ट्रांजिशन से स्वतंत्र रहती है और पूरा कंट्रोल आपके हाथ में देती है।

सही कवर कैसे तय करें?

विशेषज्ञ ₹1 करोड़ के चक्कर में पड़ने के बजाय D.I.M.E. (Debt, Income, Mortgage, and Education) फ्रेमवर्क अपनाने की सलाह देते हैं। इसमें अपने सभी वर्तमान कर्जों, घर चलाने के लिए जरूरी इनकम, होम लोन और बच्चों की शिक्षा के खर्च का सटीक आकलन किया जाता है। इन चार पहलुओं के आधार पर निकाला गया कवर ही आपके परिवार की आर्थिक सुरक्षा का असली कवच बन सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.